नात लिरिक्स

Mustafa Par Dil Se Jo Qurban Hai | Mera Raza Meri Pehchan Hai

मुस्तफ़ा पर दिल से जो क़ुर्बान है | मेरा रज़ा मेरी पहचान है

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी रहमानीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

रज़ा रज़ा ! रज़ा रज़ा ! रज़ा रज़ा ! रज़ा रज़ा !

हैं बरेली के शाह, मेरे अहमद रज़ाजिन की हर हर अदा सुन्नत-ए-मुस्तफ़ा

वादी रज़ा की, कोह-ए-हिमाला रज़ा का हैजिस सम्त देखिए वो 'इलाक़ा रज़ा का है

अगलों ने तो लिखा है बहुत 'इल्म-ए-दीन परजो कुछ है इस सदी में वो तन्हा रज़ा का है

मुस्तफ़ा पर दिल से जो क़ुर्बान हैमेरा रज़ा मेरी पहचान है

किस तरह होती हिफ़ाज़त दीन कीदौलत-ए-ईमान थी लुटने लगीमुस्तफ़ा की ज़ात पर हमले हुए'आशिक़ों के दिल पे थी अफ़्सुर्दगीजो बचाने आया फिर ईमान हैमेरा रज़ा मेरी पहचान है

दीन फैलाया नबी की आल नेऔर बचाया है नक़ी के लाल नेहम हैं रज़वी, हम ही चिश्ती क़ादरीहम को तोड़ा दुश्मनों की चाल नेहम ही ख़्वाजा वाले हैं ए'लान हैमेरा रज़ा मेरी पहचान है

हर सहाबी की मोहब्बत डाल दीदी ग़ुलामी हम को अहल-ए-बैत कीजोड़ के इन दोनों से समझा दियाहम ही अहल-ए-हक़ हैं, हम ही जन्नतीअहल-ए-सुन्नत की यही तो शान हैमेरा रज़ा मेरी पहचान है

हम बरेली वाले हैं पहचान लोहम ही अहल-ए-हक़ हैं तुम ये जान लोहम से सौदा होगा न ईमान काचाहे गोली मारो या फिर जान लोआ'ला हज़रत का ये सब फ़ैज़ान हैमेरा रज़ा मेरी पहचान है

वो अकेला होके भी लड़ता रहामुस्तफ़ा के नाम पर मरता रहारात देखी और न दिन देखा कभीशान आक़ा की बयाँ करता रहाजिस का सारी दुनिया पर एहसान हैमेरा रज़ा मेरी पहचान है

'उम्र बस पाई थी अड़सठ साल कीऔर किताबें उस ने तेरह सौ लिखीवो मुजद्दिद और मुनाज़िर बे-मिसालदबदबा है उस का, 'आसिम ! आज भी'अक़्ल जिस की ज़ात पर हैरान हैमेरा रज़ा मेरी पहचान है

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