नात लिरिक्स

Mustafa Ka Khuda Aur Khud Mustafa

मुस्तफ़ा का ख़ुदा और ख़ुद मुस्तफ़ा

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुस्तफ़ा का ख़ुदा और ख़ुद मुस्तफ़ाक्यूँ कहूँ मेरा कोई सहारा नहींमैं मदीने से लेकिन बहुत दूर हूँये ख़लिश मेरे दिल को गवारा नहीं

आप का 'इश्क़ है 'इश्क़-ए-रब्ब-उल-'उलाआप का ज़िक्र है ख़ास ज़िक्र-ए-ख़ुदाख़ुद ख़ुदा ने ये क़ुरआँ में ए'लाँ कियाजो तुम्हारा नहीं वो हमारा नहीं

इस्म-ए-अहमद की ता'ज़ीम के मुन्किरो !इस की 'अज़मत को क़ुरआन से देख लोबे-लक़ब उन का इस्म-ए-मुबारक कहींउन के मा'बूद ने भी पुकारा नहीं

ठोकरों के सिवा और पाएगा क्याजिस की मंज़िल का कोई न हो रहनुमाअपनी मंज़िल पे हरगिज़ न पहुँचेगा वोहाथ में जिस के दामन तुम्हारा नहीं

'अक़्ल-ए-जिन्न-ओ-बशर का यहाँ ज़िक्र क्यासिदरा वाले जहाँ दंग-ओ-हैरान हैंरिफ़'अत-ए-मुस्तफ़ा की मिले हद किसेये वो दरिया है जिस का किनारा नहीं

वो ही रौज़े पे बुलवाएँगे एक दिनऐ सिकंदर ! ज़रा सब्र से काम लेउन के दर का गदा और मायूस होमेरे सरकार को ये गवारा नहीं

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