नात लिरिक्स

Mustafa Jaan-e-Rehmat Pe Lakhon Salam (Short & Full)

मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

एकसमान पाठ की दो संग्रह प्रविष्टियाँ इसी मुख्य पेज पर मिलाई गई हैं। आयात में उपलब्ध नात ख़्वान श्रेय: ओवैस रज़ा क़ादरी। यह श्रेय रिकॉर्ड में दिया गया है; प्रत्येक गायन का अलग प्रमाण यहाँ उपलब्ध नहीं है।

मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलामशम'-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम

मेहर-ए-चर्ख़-ए-नुबुव्वत पे रौशन दुरूदगुल-ए-बाग़-ए-रिसालत पे लाखों सलाम

शहरयार-ए-इरम, ताजदार-ए-हरमनौ-बहार-ए-शफ़ा'अत पे लाखों सलाम

शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दुरूदनौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम

'अर्श ता फ़र्श है जिस के ज़ेर-ए-नगींउस की क़ाहिर रियासत पे लाखों सलाम

फ़त्ह-ए-बाब-ए-नुबुव्वत पे बेहद दुरूदख़त्म-ए-दौर-ए-रिसालत पे लाखों सलाम

हम ग़रीबों के आक़ा पे बेहद दुरूदहम फ़क़ीरों की सरवत पे लाखों सलाम

दूर-ओ-नज़दीक के सुनने वाले वो कानकान-ए-ला'ल-ए-करामत पे लाखों सलाम

जिस के माथे शफ़ा'अत का सेहरा रहाउस जबीन-ए-स'आदत पे लाखों सलाम

जिन के सज्दे को मेहराब-ए-का'बा झुकीउन भवों की लताफ़त पे लाखों सलाम

जिस तरफ़ उठ गई दम में दम आ गयाउस निगाह-ए-'इनायत पे लाखों सलाम

नीची आँखों की शर्म-ओ-हया पर दुरूदऊँची बीनी की रिफ़'अत पे लाखों सलाम

पतली पतली गुल-ए-क़ुद्स की पत्तियाँउन लबों की नज़ाकत पे लाखों सलाम

वो दहन जिस की हर बात वह्य-ए-ख़ुदाचश्मा-ए-'इल्म-ओ-हिकमत पे लाखों सलाम

वो ज़बाँ जिस को सब कुन की कुंजी कहेंउस की नाफ़िज़ हुकूमत पे लाखों सलाम

उस की बातों की लज़्ज़त पे लाखों दुरूदउस के ख़ुत्बे की हैबत पे लाखों सलाम

जिस की तस्कीं से रोते हुए हँस पड़ेंउस तबस्सुम की 'आदत पे लाखों सलाम

हाथ जिस सम्त उट्ठा ग़नी कर दियामौज-ए-बहर-ए-समाहत पे लाखों सलाम

जिस को बार-ए-दो-'आलम की पर्वा नहींऐसे बाज़ू की क़ुव्वत पे लाखों सलाम

'ईद-ए-मुश्किल-कुशाई के चमके हिलालनाख़ुनों की बिशारत पे लाखों सलाम

कुल जहाँ मिल्क और जव की रोटी ग़िज़ाउस शिकम की क़ना'अत पे लाखों सलाम

खाई क़ुरआँ ने ख़ाक-ए-गुज़र की क़समउस कफ़-ए-पा की हुर्मत पे लाखों सलाम

जिस सुहानी घड़ी चमका तयबा का चाँदउस दिल-अफ़रोज़ सा'अत पे लाखों सलाम

किस को देखा ये मूसा से पूछे कोईआँखों वालों की हिम्मत पे लाखों सलाम

उन के आगे वो हम्ज़ा की जाँ-बाज़ियाँशेर-ए-ग़ुर्रान-ए-सतवत पे लाखों सलाम

उन के मौला की उन पर करोरों दुरूदउन के असहाब-ओ-'इतरत पे लाखों सलाम

सय्यिदा ज़ाहिरा तय्यिबा ताहिराजान-ए-अहमद की राहत पे लाखों सलाम

हसन-ए-मुज्तबा सय्यिद-उल-अस्ख़ियाराकिब-ए-दोश-ए-'इज़्ज़त पे लाखों सलाम

उस शहीद-ए-बला शाह-ए-गुलगूँ-क़बाबेकस-ए-दश्त-ए-ग़ुर्बत पे लाखों सलाम

बिन्त-ए-सिद्दीक़ आराम-ए-जान-ए-नबीउस हरीम-ए-बराअत पे लाखों सलाम

या'नी है सूरा-ए-नूर जिन की गवाहउन की पुरनूर सूरत पे लाखों सलाम

साया-ए-मुस्तफ़ा माया-ए-इस्तफ़ा'इज़्ज़-ओ-नाज़-ए-ख़िलाफ़त पे लाखों सलाम

या'नी उस अफ़ज़लुल-ख़ल्क़ बा'दर्रुसुलसानि-यसनैन-ए-हिजरत पे लाखों सलाम

अस्दक़ुस्सादिक़ीं सय्यिद-उल-मुत्तक़ींचश्म-ओ-गोश-ए-विज़ारत पे लाखों सलाम

वो 'उमर जिस के आ'दा पे शैदा सक़रउस ख़ुदा-दोस्त हज़रत पे लाखों सलाम

दुर्र-ए-मंसूर क़ुरआँ की सिल्क-ए-बहीज़ौज-ए-दो-नूर-ए-'इफ़्फ़त पे लाखों सलाम

मुर्तज़ा शेर-ए-हक़ अश्ज'उल अश्ज'ईंसाक़ी-ए-शीर-ओ-शरबत पे लाखों सलाम

अस्ल-ए-नस्ल-ए-सफ़ा वज्ह-ए-वस्ल-ए-ख़ुदाबाब-ए-फ़स्ल-ए-विलायत पे लाखों सलाम

ग़ौस-ए-आ'ज़म इमामुत्तुक़ा वन्नुक़ाजल्वा-ए-शान-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम

जिस की मिम्बर हुई गर्दन-ए-औलियाउस क़दम की करामत पे लाखों सलाम

एक मेरा ही रहमत में दा'वा नहींशाह की सारी उम्मत पे लाखों सलाम

काश ! महशर में जब उन की आमद हो औरभेजें सब उन की शौकत पे लाखों सलाम

मुझ से ख़िदमत के क़ुदसी कहें हाँ रज़ामुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।