नात लिरिक्स

Mustafa Aap Ke Jaisa Koi Aaya Hi Nahin

मुस्तफ़ा आप के जैसा कोई आया ही नहीं

नात ख़्वान: शमीम फ़ैज़ीशायर: शमीम फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुस्तफ़ा आप के जैसा कोई आया ही नहींआता भी कैसे, जब अल्लाह ने बनाया ही नहीं

कोई सानी न है रब का, न मेरे आक़ा काएक का जिस्म नहीं, एक का साया ही नहीं

क़ब्र में जब कहा सरकार ने, ये मेरा हैफिर फ़रिश्तों ने मुझे हाथ लगाया ही नहीं

ज़ुल्फ़ वल्लैल है, रुख़ वद्दुहा, मा-ज़ाग़ आँखेंइस तरह रब ने किसी को भी सजाया ही नहीं

आप ने जब से नवाज़ा है, या रसूलल्लाह !मैं ने दामन किसी चौखट पे बिछाया ही नहीं

जिस ने सरकार के चेहरे की ज़ियारत की हैउस की नज़रों में कोई और समाया ही नहीं

लौट कर आ गया मक्के से, मदीने न गयाकैसे जाता, तुझे आक़ा ने बुलाया ही नहीं

जब से दरवाज़े पे लिखा मैं ने आ'ला हज़रतकोई गुस्ताख़-ए-नबी घर मेरे आया ही नहीं

जब से दरवाज़े पे लिखा है या रसूलल्लाहकोई गुस्ताख़-ए-नबी घर मेरे आया ही नहीं

जब तलक पुश्त पे शब्बीर रहे, ऐ फ़ैज़ी !सर को सज्दे से पयम्बर ने उठाया ही नहीं

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