नात लिरिक्स

Jahaan Pe Mere Payambar Ka Tazkira Hoga | Husain Tere Hi Qabze Mein Karbala Hoga

जहाँ पे मेरे पयंबर का तज़्किरा होगा | हुसैन तेरे ही क़ब्ज़े में कर्बला होगा

नात ख़्वान: शमीम फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जहाँ पे मेरे पयंबर का तज़्किरा होगाख़ुदा के फ़ज़्ल का पहरा वहाँ लगा होगायज़ीदी पहरा लगाएँ तो उस से क्या होगाहुसैन ! तेरे ही क़ब्ज़े में कर्बला होगा

क़सम ख़ुदा की ! वो मंज़र बदल गया होतायज़ीदियों का कलेजा दहल गया होताहुसैन हाथ दु'आ को अगर उठा देतेतो कर्बला में भी ज़मज़म निकल गया होता

नज़र से ख़ून, नज़ारों से ख़ून टपकेगाइशारा होता, इशारों से ख़ून टपकेगाअगर हुसैन के सज्दे को भूल जाओगेतो मस्जिदों के मीनारों से ख़ून टपकेगा

लहू में रंग है बाक़ी तो कर्बला चलिएअगर है ख़ून में गर्मी तो कर्बला चलिएनबी के नाम का सदक़ा लुटा रहे हैं हुसैनकिसी को चाहिए पानी तो कर्बला चलिए

वहाँ की मौत भली है, यहाँ के जीने सेजहाँ निकलता है ज़मज़म ज़मीं के सीने सेमैं उस हुसैन को क़ुरआँ नहीं तो क्या समझूँरसूल-ए-पाक लगाते हैं जिन को सीने से

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