नात लिरिक्स

Musallam-us-Suboot Hai Fazeelat-e-Muawiya

मुसल्लम-उस-सुबूत है फ़ज़ीलत-ए-मुआविया

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: सलमान रज़ा फ़रीदी मिस्बाहीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुसल्लम-उस-सुबूत है फ़ज़ीलत-ए-मु'आविया'अयाँ है शम्स की तरह करामत-ए-मु'आविया

वो जिस से रूठ जाएँ तो रसूल उस से रूठ जाएँनबी से इस तरह की है क़राबत-ए-मु'आविया

ख़ुदा के फ़ज़्ल से मिली उन्हें वो 'अज़मत-ए-गिराँकोई न तौल पाएगा जलालत-ए-मु'आविया

नसब में हैं तजल्लियाँ क़बीला-ए-रसूल कीक़ुरैशियत से बढ़ गई शराफ़त-ए-मु'आविया

हैं उन की ख़्वाहर-ए-'अज़ीज़ जुमला मोमिनों की माँबड़ी शरफ़-मआब है नजाबत-ए-मु'आविया

गुल-ए-हयात उन का है सहाबियत से 'इत्र-बेज़इसी लिए है नौ-ब-नौ नज़ारत-ए-मु'आविया

तमाम मोमिनों के आप प्यारे मामूँ-जान हैंहमें बहुत 'अज़ीज़ है ये निस्बत-ए-मु'आविया

हसन के दस्त-ए-पाक से बने ख़लीफ़ा-ए-रसूलरिज़ा-ए-आल-ए-मुस्तफ़ा ख़िलाफ़त-ए-मु'आविया

मु'आविया के प्यार से हमारा बेड़ा पार हैगुनाह बख़्शवाएगी शफ़ा'अत-ए-मु'आविया

उन्हें कोई बुरा कहे तो उस के मुँह में ख़ाक-ओ-आगन सुन सकेंगे हम कभी इहानत-ए-मु'आविया

जो 'आशिक़-ए-रसूल हैं वो उन से प्यार करते हैंफ़क़त मुनाफ़िक़ों को है 'अदावत-ए-मु'आविया

यज़ीद के फ़रेब का मु'आविया से क्या हिसाबनिभा न पाया वो शक़ी नियाबत-ए-मु'आविया

वो कर गए नसीहतें उसूल-ए-हक़ पे चलने कीपिसर के फ़े'ल-ए-बद से है बराअत-ए-मु'आविया

वो अहल-ए-बैत के मुहिब, वो अहल-ए-बैत के हबीबदो-आतिशा हुई है यूँ वजाहत-ए-मु'आविया

हैं अपने इज्तिहाद में वो दोनों मुस्तहिक़्क़-ए-अज्ररखें हम उल्फ़त-ए-'अली 'अक़ीदत-ए-मु'आविया

बड़ो के इख़्तिलाफ़ में पड़े न हम यही है ख़ैरहो दिल में 'इज़्ज़त-ए-'अली इरादत-ए-मु'आविया

वो नज्म-ए-बुर्ज-ए-रुश्द हैं, वो हादी-ए-रह-ए-इरमफ़लाह-ए-दो-जहाँ बनी क़यादत-ए-मु'आविया

मिला उन्हें भी इफ़्तिख़ार वह्य-ए-पाक लिखने काहै ला-ज़वाल ता-अबद किताबत-ए-मु'आविया

कहा है 'आदिल-ओ-सिक़ा मुहद्दिसीन ने उन्हेंहदीस में है मुस्तनद रिवायत-ए-मु'आविया

उन्हें दु'आ नबी ने दी है महदी और हादी कीहर एक शक से दूर है हिदायत-ए-मु'आविया

तबर्रुकात-ए-मुस्तफ़ा लहद के वासिते चुने'अक़ीदे का चराग़ है वसिय्यत-ए-मु'आविया

कुशादा उन का दस्त-ए-पाक आसमान की तरहमिसाल-ए-बारिश-ए-रवाँ सख़ावत-ए-मु'आविया

सहाबा, ताब'ईन हों, कि औलिया-ए-दीन होंसब अहल-ए-हक़ ने मानी है इमामत-ए-मु'आविया

न राफ़ज़ी, न ख़ारजी, फ़क़त हैं सुन्नी मो'तदिलयज़ीद से जुदाई और रफ़ाक़त-ए-मु'आविया

हर इक 'अदू पे ला'नतें ख़ुदा की और रसूल कीहै बा'इस-ए-रिज़ा-ए-रब इता'अत-ए-मु'आविया

ये गौहर-ए-हयात है, ये तोशा-ए-नजात हैदिल-ए-फ़रीद को मिली मोहब्बत-ए-मु'आविया

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