नात लिरिक्स

Jahan-bani Ata Kar Den Bhari Jannat Hiba Kar Den | Muanawwar Meri Aankhon Ko Mere Shamsudduha Kar Den

जहाँ-बानी अता कर दें भरी जन्नत हिबा कर दें | मुनव्वर मेरी आँखों को मेरे शम्सुद्दुहा कर दें

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: अख़्तर रज़ा ख़ान बरेलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुनव्वर मेरी आँखों को, मेरे शम्सुद्दुहा ! कर देंग़मों की धूप में वो साया-ए-ज़ुल्फ़-ए-दोता कर दें

जहाँ-बानी 'अता कर दें, भरी जन्नत हिबा कर देंनबी मुख़्तार-ए-कुल हैं, जिस को जो चाहें 'अता कर दें

जहाँ में उन की चलती है, वो दम में क्या से क्या कर देंज़मीं को आसमाँ कर दें, सुरय्या को सरा कर दें

फ़ज़ा में उड़ने वाले यूँ न इतराएँ, निदा कर देंवो जब चाहें, जिसे चाहें, उसे फ़रमाँ-रवा कर दें

मेरी मुश्किल को यूँ आसाँ, मेरे मुश्किल-कुशा ! कर देंहर इक मौज-ए-बला को, मेरे मौला ! ना-ख़ुदा कर दें

'अता हो बेख़ुदी मुझ को, ख़ुदी मेरी हवा कर देंमुझे यूँ अपनी उल्फ़त में, मेरे मौला ! फ़ना कर दें

जहाँ में 'आम पैग़ाम-ए-शह-ए-अहमद-रज़ा कर देंपलट कर पीछे देखें फिर से तज्दीद-ए-वफ़ा कर दें

नबी से जो हो बेगाना, उसे दिल से जुदा कर देंपिदर, मादर, बिरादर, माल-ओ-जाँ उन पर फ़िदा कर दें

तबस्सुम से गुमाँ गुज़रे शब-ए-तारीक पर दिन काज़िया-ए-रुख़ से दीवारों को रौशन आईना कर दें

किसी को वो हँसाते हैं, किसी को वो रुलाते हैंवो यूँही आज़माते हैं, वो अब तो फ़ैसला कर दें

गिल-ए-तयबा में मिल जाऊँ, गुलों में मिल के खिल जाऊँहयात-ए-जावेदानी से मुझे यूँ आश्ना कर दें

उन्हें मंज़ूर है जब तक ये दौर-ए-आज़माइश हैन चाहें तो अभी वो ख़त्म दौर-ए-इब्तिला कर दें

सग-ए-आवारा-ए-सहरा से उक्ता सी गई दुनियाबचाओ अब ज़माने का सगान-ए-मुस्तफ़ा कर दें

मुझे क्या फ़िक्र हो, अख़्तर ! मेरे यावर हैं वो यावरबलाओं को मेरी जो ख़ुद गिरफ़्तार-ए-बला कर दें

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