नात लिरिक्स

Mujhe Tayba Ki Galiyon Ke Wo Manzar Yaad Aate Hain | Mujhe Taiba Ki Galiyon Ke Wo Manzar Yaad Aate Hain

मुझे तयबा की गलियों के वो मंज़र याद आते हैं

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीना याद आता है, मदीना याद आता है

ये तो तयबा की मोहब्बत का असर है वर्नाकौन रोता है लिपट कर दर-ओ-दीवार के साथ

मुझे तयबा की गलियों के वो मंज़र याद आते हैंजो फूलों से भी नाज़ुक हैं वो पत्थर याद आते हैं

मुझे तयबा नगर की चाँद रातें याद आती हैंखजूरें बाँटते बच्चों की बातें याद आती हैं

मुझे तयबा की गलियों के वो मंज़र याद आते हैंजो फूलों से भी नाज़ुक हैं वो पत्थर याद आते हैं

वुज़ू ज़मज़म से कर के सर झुकाना याद है मुझ कोग़िलाफ़-ए-का'बा में मुँह को छुपाना याद है मुझ को

दर-ए-सरकार की दिलकश फ़ज़ाएँ याद आती हैंकरम बरसाती वो काली घटाएँ याद आती हैं

मुझे तयबा की गलियों के वो मंज़र याद आते हैंजो फूलों से भी नाज़ुक हैं वो पत्थर याद आते हैं

सलाम-ए-शौक़ कहना धड़कनों का याद आता हैबिछाना दर पे चादर साइलों का याद आता है

मुझे तयबा की गलियों के वो मंज़र याद आते हैंजो फूलों से भी नाज़ुक है वो पत्थर याद आते हैं

मदीना याद आता है, मदीना याद आता है

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