नात लिरिक्स

Mujhe Bhi Shaahid-e-Asra Bana Diya Hota | Mere Khuda Mujhe Aisa Bana Diya Hota

मुझे भी शाहिद-ए-अस्रा बना दिया होता | मेरे ख़ुदा मुझे ऐसा बना दिया होता

नात ख़्वान: शोऐब रज़ा वारसीशायर: सरदार सलीमउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे ख़ुदा ! मुझे ऐसा बना दिया होतानबी की नक़्श-ए-कफ़-ए-पा बना दिया होता

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मुझे भी शाहिद-ए-अस्रा बना दिया होतानबी की गर्द-ए-कफ़-ए-पा बना दिया होता

नबी के शहर को उड़ते हुए पहुँच जाताकि तूने मुझ को परिंदा बना दिया होता

बना के मुझ को कबूतर गुफ़ा में रख देतानहीं तो मकड़ी का जाला बना दिया होता

सहाबा गिरने न देते ज़मीन पर मुझ कोवुज़ू के पानी का क़तरा बना दिया होता

हसन-हुसैन मेरे साथ खेलते होतेकि मुझ को उन का खिलौना बना दिया होता

उधेड़ कर मेरी चमड़ी, ए ख़ालिक़-ए-अकबर !नबी के पाँव का जूता बना दिया होता

जलन से देखते हीरे-जवाहिरात मुझेनबी के शहर का काँटा बना दिया होता

बना दी होती जहाँ में सलीम की तारीख़ख़त उन के हाथ का लिखा बना दिया होता

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मैं उन की राह में कालीन बन के बिछ जातामुझे हुज़ूर का रस्ता बना दिया होता

फ़राग़तों के समर मुझ में रख दिए होतेअबू-हुरैरा का बस्ता बना दिया होता

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