नात लिरिक्स

Mujhe Bakhsh De Be Sabab Ya Ilahi

मुझे बख़्श दे बे-सबब या इलाही

नात ख़्वान: महमूद अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुझे बख़्श दे बे-सबब, या इलाही !न करना कभी भी ग़ज़ब, या इलाही !

गुनाहों ने, हाए ! कहीं का न छोड़ामैं कब तक फिरूँ ख़्वार अब, या इलाही !

बड़ा हज पे आने को जी चाहता हैबुलावा अब आएगा कब, या इलाही !

मैं मक्के में आऊँ, मदीने में आऊँबना कोई ऐसा सबब, या इलाही !

मैं देखूँ मदीने का गुलशन, दिखा देतू दश्त-ओ-जिबाल-ए-'अरब, या इलाही !

करम ऐसा कर दे, मदीने में आ करगुज़ारूँ मैं फिर रोज़-ओ-शब, या इलाही !

जो माँगा वो दे मुझ को, वो भी 'अता करनहीं कर सका जो तलब, या इलाही !

सभी एक हो जाएँ ईमान वालेपए शाह-ए-'आली-नसब, या इलाही !

ख़ुदाया ! बुरे ख़ातिमे से बचा लेगुनहगार है जाँ ब-लब, या इलाही !

नज़र में मुहम्मद के जल्वे बसे होंचलूँ इस जहाँ से मैं जब, या इलाही !

पस-ए-मर्ग हो रोज़-ए-रौशन की मानिंदमेरी क़ब्र की तीरा-शब, या इलाही !

गुनाहों से 'अत्तार को दे मु'आफ़ीकरम हो, न करना ग़ज़ब, या इलाही !

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