नात लिरिक्स

Mujh Ko Ramzan Se Mohabbat Hai

मुझ को रमज़ान से मोहब्बत है

नात ख़्वान: हसनैन रज़ा अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरे रब की ये ख़ास रहमत हैमुस्तफ़ा की बड़ी 'इनायत हैग़ौस-ओ-अहमद रज़ा की बरकत हैमुझ को रमज़ान से मोहब्बत है

माह-ए-रमज़ाँ से जिस को उल्फ़त हैक़ाबिल-ए-रश्क उस की क़िस्मत हैबेशक उस पर ख़ुदा की रहमत हैक़ब्र-ओ-महशर में वो सलामत है

माह-ए-रमज़ाँ जहाँ में फिर आयामग़्फ़िरत का पयाम है लायारहमत-ए-हक़ का हो गया सायालहज़ा लहज़ा नुज़ूल-ए-रहमत है

ख़ूब रौनक़ है माह-ए-गुफ़राँ कीकैसी बरकत है माह-ए-क़ुरआँ कीवाह क्या बात माह-ए-रमज़ाँ की !क्या ही रमज़ाँ की शान-ओ-शौकत है

पहला 'अशरा है ख़ास रहमत कादूसरा मग़्फ़िरत का है 'अशरातीसरे में मिलेगी आज़ादीनार से उस को जिस पे रहमत है

मस्जिदें हो गई हैं फिर आबादबढ़ गई नेकियों की है ता'दादसर्द बदियों का हो गया बाज़ारबढ़ गया जज़्बा-ए-'इबादत है

वाह ! सहरी की क्या बहारें हैंख़ूब इफ़्तार के नज़ारे हैंरोज़ा-दारों के वारे नियारे हैंक्या तरावीह की भी लज़्ज़त है

माह-ए-रमज़ाँ का ग़म 'अता फ़रमाया ख़ुदा ! चश्म-ए-नम 'अता फ़रमामाह-ए-रमज़ाँ के 'इश्क़ में रोनादो जहाँ के लिए स'आदत है

माह-ए-रमज़ाँ के रोज़ा-दारों कीख़ुश-नसीबी है और ख़ुश-बख़्तीउस को फ़ैज़ान-ए-माह-ए-रमज़ाँ सेख़ुल्द मिलती है, मिलती जन्नत है

मालिक-ए-दो जहाँ ! प-ए-जानाँतू बना इस को 'आशिक़-ए-रमज़ाँमाह-ए-रमज़ाँ के 'इश्क़ में तड़पे'अर्ज़-ए-'अत्तार, रब्ब-ए-'इज़्ज़त है

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