नात लिरिक्स

Muhammad Mustafa Aaye Baharon Par Bahar Aayi

मुहम्मद मुस्तफ़ा आए बहारों पर बहार आई

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: अल्लामा साइम चिस्तीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुहम्मद मुस्तफ़ा आए, बहारों पर बहार आईज़मीं को चूमने जन्नत की ख़ुश्बू बार-बार आई

मुहम्मद मुस्तफ़ा आए

जनाब-ए-आमिना का चाँद जब चमका ज़माने मेंक़मर की चाँदनी क़दमों पे होने को निसार आई

मुहम्मद मुस्तफ़ा आए, बहारों पर बहार आईमुहम्मद मुस्तफ़ा आए

बड़ी मायूस थी दाई हलीमा जब गई मक्केमगर आई तो ले कर दो जहाँ का ताजदार आई

मुहम्मद मुस्तफ़ा आए, बहारों पर बहार आईमुहम्मद मुस्तफ़ा आए

हलीमा दो जहाँ क़ुर्बान हों तेरे मुक़द्दर परतेरे कच्चे से घर में रहमत-ए-परवरदिगार आई

मुहम्मद मुस्तफ़ा आए, बहारों पर बहार आईमुहम्मद मुस्तफ़ा आए

वो आए तो मनादी हो गई, साइम ! ज़माने मेंबहार आई, बहार आई, बहारों पर बहार आई

मुहम्मद मुस्तफ़ा आए, बहारों पर बहार आईज़मीं को चूमने जन्नत की ख़ुश्बू बार-बार आई

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