नात लिरिक्स

Mubarak Mubarak Huzoor Aa Rahe Hain

मुबारक मुबारक हुज़ूर आ रहे हैं

नात ख़्वान: अब्दुल हबीब अत्तारी, आसिफ़ अत्तारी औरशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी

हुज़ूर आ रहे हैं, हुज़ूर आ रहे हैं

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! मरहबा !

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

न क्यूँ आज झूमें कि सरकार आएख़ुदा की ख़ुदाई के मुख़्तार आए

न क्यूँ बारह्वीं पे हमें प्यार आएकि आए इसी रोज़ सरकार आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

हुज़ूर की आमद ! मरहबा !पुर-नूर की आमद ! मरहबा !सादिक़ की आमद ! मरहबा !अमीन की आमद ! मरहबा !

मुसर्रत से हम क्यूँ न धूमें मचाएँहमारे शहंशाह-ओ-सरदार आए

मुसलमानो ! सुब्ह-ए-बहाराँ मुबारकवो बरसाते अनवार सरकार आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

मुबारक तुझे, आमिना ! हो मुबारकतेरे घर शहंशाह-ए-अबरार आए

मुबारक, हलीमा ! तुझे भी मुबारकतेरे घर में नबियों के सरदार आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

'अदद हम को बारह का क्यूँ हो न प्याराकि बारह को दुनिया में सरकार आए

दुरूदों के गजरे लिये अब बढ़ो तुमवो आए रसूलों के सालार आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

अव्वल की आमद ! मरहबा !आख़िर की आमद ! मरहबा !यासीन की आमद ! मरहबा !ताहा की आमद ! मरहबा !

सुवाल अपनी उम्मत की बख़्शिश का करतेवो हम 'आसियों के तरफ़-दार आए

न क्यूँ आज जश्न-ए-विलादत मनाएँनज़र रब की रहमत के आसार आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

'नहीं' जिन की प्यारी ज़ुबाँ पर नहीं हैवो मक्के में सख़ियों के सरदार आए

विलादत का सदक़ा, हमें अपना ग़म दोशहा ! चश्म-ए-नम के तलबगार आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

यतीमों के वाली, ग़रीबों के हामीवो आफ़त-ज़दों के मददगार आए

सियाही हमारे गुनाहों की धोनेबहाते हुए अश्क सरकार आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

विलादत का सदक़ा, बक़ी'-ए-मुबारककी दो गज़ ज़मीं के तलबगार आए

विलादत का सदक़ा, मदीने में, आक़ा !मुझे मौत, ए मेरे सरकार ! आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

विलादत का सदक़ा, निक़ाब अब उठा दोलिये हम सब उम्मीद-ए-दीदार आए

विलादत का सदक़ा, पड़ोसी बनानाशहा ! ख़ुल्द में जब ये बद-कार आए

विलादत का सदक़ा, शहा ! ज़िंदगी मेंमदीने में हर साल 'अत्तार आए

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

सरकार की आमद ! मरहबा !दिलदार की आमद ! मरहबा !सालार की आमद ! मरहबा !सरदार की आमद ! मरहबा !

मुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैंमुबारक ! मुबारक ! हुज़ूर आ रहे हैं

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