नात लिरिक्स

Muaf Fazl-o-Karam Se Ho Har Khata Ya Rab

मुआफ़ फ़ज़्ल-ओ-करम से हो हर ख़ता या रब

नात ख़्वान: मौलाना मुहम्मद बिलाल रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मु'आफ़ फ़ज़्ल-ओ-करम से हो हर ख़ता, या रब !हो मग़्फ़िरत प-ए-सुल्तान-ए-अंबिया, या रब !

बिला-हिसाब हो जन्नत में दाख़िला, या रब !पड़ोस ख़ुल्द में सरवर का हो 'अता, या रब !

नबी का सदक़ा सदा के लिए तू राज़ी होकभी भी होना न नाराज़, या ख़ुदा या रब !

तेरे हबीब अगर मुस्कुराते आ जाएँतो बिल-यक़ीन उठे क़ब्र जगमगा, या रब !

ख़ज़ाँ फटक न सके पास, दे बहार ऐसीरहे हयात का गुलशन हरा-भरा, या रब !

हमारे दिल से निकल जाए उल्फ़त-ए-दुनियादे दिल में 'इश्क़-ए-मुहम्मद मेरे रचा, या रब !

नबी की दीद हमारी है 'ईद, या अल्लाह !'अता हो ख़्वाब में दीदार-ए-मुस्तफ़ा, या रब !

तेरे हबीब की सुन्नत की धूम मच जाएगली गली में फिरे मदनी क़ाफ़िला, या रब !

मेरी ज़बान पे क़ुफ़्ल-ए-मदीना लग जाएफ़ुज़ूल-गोई से बचता रहूँ सदा, या रब !

उठे न आँख कभी भी गुनाह की जानिब'अता करम से हो ऐसी मुझे हया, या रब !

किसी की ख़ामियाँ देखें न मेरी आँखें औरसुनें न कान भी 'ऐबों का तज़्किरा, या रब !

तुलें न हश्र में 'अत्तार के 'अमल, मौला !बिला-हिसाब ही तू इस को बख़्शना, या रब !

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