नात लिरिक्स

Mojiza Kitna Nirala Ye Hua Meraj Mein | Meraj Ko Chala Dulha

मोजिज़ा कितना निराला ये हुआ मेराज में | मेराज को चला दूल्हा

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मे'राज को चला दूल्हा, मे'राज को चला दूल्हा

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज मेंला-मकाँ पहुँचे हबीब-ए-किब्रिया मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

भीनी भीनी थी हवा और रंग-ए-गुलशन था खिलाकोयल-ओ-बुलबुल भी थे नग़्मा-सरा मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

प्यारे आक़ा के क़दम पर हज़रत-ए-जिब्रील नेअपने नूरानी लबों को रख दिया मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

हर तरफ़ शादी रची है, हर कोई है शादमाँआज महबूब-ए-ख़ुदा दूल्हा बना मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

जान-ए-ईमाँ जान-ए-इंसाँ की सलामी के लिएआसमाँ पर मुंतज़िर थे अंबिया मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

हूर-ओ-ग़िल्माँ और फ़रिश्ते मरहबा कहने लगेजिस घड़ी पहुँचे फ़लक पर मुस्तफ़ा मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

पेश कर के अपना काँधा पा गए आ'ला मक़ामग़ौस-ए-आ'ज़म पेशवा-ए-औलिया मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

हम गुनहगारों से कितना प्यार है सरकार कोआप ने हक़ में हमारे की दु'आ मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

ज़ात-ए-रब और ज़ात-ए-पाक-ए-मुस्तफ़ा के दरमियाँकौन जाने किस क़दर था फ़ासला मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

रुक गए सिदरा पे जा के हज़रत-ए-रूह-उल-अमींसिदरा से आगे गया नूर-ए-ख़ुदा मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

गर्म बिस्तर भी रहा ज़ंजीर भी हिलती रहीआना-जाना मुस्तफ़ा का यूँ हुआ मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

चाँद तारों को, ऐ 'आसिम ! नाज़ था ख़ुद पर बड़ाआ गए वो भी नबी के ज़ेर-ए-पा मे'राज में

मो'जिज़ा कितना निराला ये हुआ मे'राज में

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