नात लिरिक्स

Mohabbat Mein Apni Guma Ya Ilahi

मोहब्बत में अपनी गुमा या इलाही

नात ख़्वान: हाजी मुश्ताक़ अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मोहब्बत में अपनी गुमा, या इलाही !न पाऊँ मैं अपना पता, या इलाही !

रहूँ मस्त-ओ-बेख़ुद मैं तेरी विला मेंपिला जाम ऐसा पिला, या इलाही !

मैं बेकार बातों से बच के हमेशाकरूँ तेरी हम्द-ओ-सना, या इलाही !

मेरे अश्क बहते रहें, काश ! हर-दमतेरे ख़ौफ़ से, या ख़ुदा या इलाही !

तेरे ख़ौफ़ से, तेरे डर से हमेशामैं थरथर रहूँ काँपता, या इलाही !

मेरे दिल से दुनिया की चाहत मिटा करकर उल्फ़त में अपनी फ़ना, या इलाही !

तू अपनी विलायत की ख़ैरात दे देमेरे ग़ौस का वासिता, या इलाही !

गुनाहों ने मेरी कमर तोड़ डालीमेरा हश्र में होगा क्या, या इलाही !

गुनाहों के अमराज़ से नीम-जाँ हूँप-ए-मुर्शिदी दे शिफ़ा, या इलाही !

बना दे मुझे नेक नेकों का सदक़ागुनाहों से हर-दम बचा, या इलाही !

मेरा हर 'अमल बस तेरे वासिते होकर इख़्लास ऐसा 'अता, या इलाही !

'इबादत में गुज़रे मेरी ज़िंदगानीकरम हो करम, या ख़ुदा या इलाही !

मुसलमाँ है 'अत्तार तेरी 'अता सेहो ईमान पर ख़ातिमा, या इलाही !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।