नात लिरिक्स

Mitte Hain Jahan Bhar Ke Aalam Madine Mein | Bigde Hue Bante Hain Har Kaam Madine Mein

मिटते हैं जहाँ भर के आलाम मदीने में | बिगड़े हुए बनते हैं हर काम मदीने में

नात ख़्वान: मुहम्मद शरजील अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मिटते हैं जहाँ भर के आलाम मदीने मेंबिगड़े हुए बनते हैं हर काम मदीने में

आक़ा की 'इनायत है हर-गाम मदीने मेंहोता नहीं कोई भी नाकाम मदीने में

ऐ हाजिओ ! रो रो कर कह देना सलाम उन सेले जाओ ग़रीबों का पैग़ाम मदीने में

आ जाओ, गुनहगारो ! बे-ख़ौफ़ चले आओसरकार की रहमत तो है 'आम मदीने में

वो शाफ़े'-ए-महशर तो बुलवा के ग़ुलामों कोदेते हैं शफ़ा'अत का इन'आम मदीने में

छेड़ो न, तबीबो ! तुम बीमार-ए-मदीना कोइस को तो मिलेगा बस आराम मदीने में

जितने भी मुबल्लिग़ हैं, हो ख़ास करम उन परसब आएँ, शहंशाह-ए-इस्लाम ! मदीने में

दरबार में जब पहुँचूँ, ऐ काश शहा ! उस दमदीदार का हो जाए इन'आम मदीने में

ऐ काश ! कि रो रो कर दम तोड़ दूँ क़दमों मेंहो जाए मेरा बिल-ख़ैर अंजाम मदीने में

लिल्लाह क़ियामत तक जिस का न ख़ुमार उतरेउल्फ़त का पियूँ ऐसा इक जाम मदीने में

ऐ काश ! तड़प कर मैं, सरकार ! लगूँ गिरनेऔर आप मुझे बढ़ कर लें थाम मदीने में

बुलवा के बक़ी'अ, आक़ा ! हसनैन के सदक़े में'ईदी में 'अता कर दो इन'आम मदीने में

वो अपने ग़ुलामों को शफ़क़त से पिलाते हैंभर भर के मय-ए-उल्फ़त के जाम मदीने में

इंसाँ के बजाए मैं, ऐ काश ! मुक़द्दर सेहोता कोई अदना सग गुमनाम मदीने में

जब शाह-ए-मदीना ने पर्दा किया दुनिया सेवल्लाह गया था मच कोहराम मदीने में

'अत्तार पे अब ऐसा, ऐ काश ! करम हो जाएमक्के में सहर गुज़रे तो शाम मदीने में

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