नात लिरिक्स

Misaal-e-Mustafa Koi Payambar Ho Nahin Sakta

मिसाल-ए-मुस्तफ़ा कोई पयम्बर हो नहीं सकता

नात ख़्वान: अमीर हम्ज़ा ख़लीलाबादीशायर: अशरफ़ी मियाँउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मिसाल-ए-मुस्तफ़ा कोई पयम्बर हो नहीं सकतासितारा लाख चमके, मेहर-ए-अनवर हो नहीं सकता

तजल्ली ज़ात की है जल्वा-ए-रुख़्सार-ए-अहमद मेंहसीं ऐसा कोई, अल्लाहु अकबर ! हो नहीं सकता

बड़ों में सब से पहले किस ने तस्दीक़-ए-रिसालत कीसदाक़त में कोई सिद्दीक़-ए-अकबर हो नहीं सकता

नबी के यार और अन्सार सब अफ़ज़ल हैं 'आलम मेंमगर मिस्ल-ए-'अली कोई बिरादर हो नहीं सकता

हबीब-ए-किब्रिया के जा-नशीं फ़ारूक़-ओ-'उस्माँ हैंकोई इन ख़ासगान-ए-हक़ का हम-सर हो नहीं सकता

कोई हो मुत्तक़ी-ओ-'आलिम-ओ-ज़ाहिद ज़माने मेंमगर आल-ए-मुहम्मद के बराबर हो नहीं सकता

चढ़ाया उन को काँधे पर रसूलुल्लाह ने अक्सरकोई हम-रुत्बा-ए-शब्बीर-ओ-शब्बर हो नहीं सकता

हुआ तू, अशरफ़ी ! मद्दाह सुलतान-ए-दो-'आलम कानसीबे का कोई ऐसा सिकंदर हो नहीं सकता

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