नात लिरिक्स

Mehshar Mein Maghfirat Ki Khabar Ghaus-e-Pak Hain

महशर में मग़्फ़िरत की ख़बर ग़ौस-ए-पाक हैं

नात ख़्वान: अमीर हम्ज़ा ख़लीलाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

महशर में मग़्फ़िरत की ख़बर ग़ौस-ए-पाक हैंसब कुछ मेरा है, मेरे अगर ग़ौस-ए-पाक हैं

ख़ैर-उल-वरा की आल हैं मौला 'अली के लालख़ैरुन्निसा के नूर-ए-नज़र ग़ौस-ए-पाक हैं

बग़दाद मोहतरम है दयार-ए-नबी के बा'दया'नी रसूल इधर तो उधर ग़ौस-ए-पाक हैं

उन के नसब में नूर-ए-मुहम्मद है जल्वा-गरबेशक हसन के लख़्त-ए-जिगर ग़ौस-ए-पाक हैं

गर्दन पे हर वली के क़दम ग़ौस-ए-पाक कातारे हैं सब वली तो क़मर ग़ौस-ए-पाक हैं

क्या ख़ूब है नसीर ये मिस्रा' अमीर काअल्लाह भी उधर है जिधर ग़ौस-ए-पाक हैं

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