नात लिरिक्स

Hasil-e-Nau-bahar Phirte Hain | Wo Sue Lalazar Phirte Hain With Tazmeen

हासिल-ए-नौ-बहार फिरते हैं | वो सू-ए-लालाज़ार फिरते हैं तज़मीन के साथ

नात ख़्वान: अमीर हम्ज़ा ख़लीलाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हासिल-ए-नौ-बहार फिरते हैंजान-ए-लुत्फ़-ओ-क़रार फिरते हैंहुस्न के ताजदार फिरते हैंवो सू-ए-लालाज़ार फिरते हैंतेरे दिन, ऐ बहार ! फिरते हैं

यूँ तो दरबार और मजालिस मेंदाता मँगता की हैं कई क़िस्मेंकितने उलझे हुए हैं जिस-तिस मेंउस गली का गदा हूँ मैं जिस मेंमाँगते ताजदार फिरते हैं

क़ुदसियों के हुजूम शाम-ओ-सहरभेजते हैं दुरूद आक़ा परकितना पुर-कैफ़ होगा वो मंज़रलाखों क़ुदसी हैं काम-ए-ख़िदमत परलाखों गिर्द-ए-मज़ार फिरते हैं

सब की खाते हैं मार फिरते हैंपहने ज़िल्लत का हार फिरते हैंले के ज़ेहनी बुख़ार फिरते हैंजो तेरे दर से यार फिरते हैंदर-ब-दर यूँ ही ख़्वार फिरते हैं

है जहाँ गौहर-ए-हयात रज़ाबट रही है जहाँ निजात, रज़ा !क्यूँ हो मख़्सूस तेरी ज़ात, रज़ा !कोई क्यूँ पूछे तेरी बात, रज़ा !तुझ से शैदा हज़ार फिरते हैं

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन:-

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