मिले हैं ख़ाक से लेकिन बदन मैला नहीं होताशहीदान-ए-मोहब्बत का कफ़न मैला नहीं होता
मोहब्बत अहल-ए-बैत-ए-पाक की जिस दिल में पिन्हा होसदा शफ़्फ़ाफ़ रहता है, वो मन मैला नहीं होता
सना-ए-मुस्तफ़ा लिखो कि उन की मद्ह करने सेक़लम मैला नहीं होता, सुख़न मैला नहीं होता
नबी के दीन की ख़ातिर जो देता है अक़ीदत सेवो दौलत कम नहीं होती, वो धन मैला नहीं होता
हमारे जुर्म की कालक है हाज़िर बन के फ़रियादीलिबास-ए-पाक-ए-शाह-ए-ज़ुल-मिनन मैला नहीं होता
ज़बाँ तर जिन की रहती है सना-ए-शाह-ए-बतहा सेउबैद-ए-क़ादरी ! उन का दहन मैला नहीं होता
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