नात लिरिक्स

Mere Raza Sa Murshid Hona Sab Ke Bas Ki Baat Nahin Hai

मेरे रज़ा सा मुर्शिद होना सब के बस की बात नहीं है

नात ख़्वान: मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

यूँ तो जहाँ में पीर बहुत हैं, मेरे रज़ा के दीवानो !मेरे रज़ा सा मुर्शिद होना सब के बस की बात नहीं है

मुफ़्ती-ओ-क़ाज़ी, क़ाइद-ओ-मोहसिन, आ'ला साइंस-दान भी थेमेरे रज़ा के जैसा बनना सब के बस की बात नहीं है

मेरे रज़ा सा मुर्शिद होना सब के बस की बात नहीं है

लाखों मुसन्निफ़ पिछली सदी में आए थे और आएँगेलेकिन कंज़-उल-ईमाँ लिखना सब के बस की बात नहीं है

मेरे रज़ा सा मुर्शिद होना सब के बस की बात नहीं है

उन का फ़तावा रज़विय्या है देखो तैतीस जिल्दों मेंइतने सारे फ़तावे लिखना सब के बस की बात नहीं है

मेरे रज़ा सा मुर्शिद होना सब के बस की बात नहीं है

रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा ! रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा !रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा ! रज़ा रज़ा रज़ा रज़ा !

जो भी दुश्मन है मेरे रज़ा का, जल रहा है हमेशा जलेगामस्लक-ए-आ'ला-हज़रत का ना'रा लग रहा है हमेशा लगेगा

वो रज़ा का घराना है, प्यारे ! 'इल्म का कारख़ाना है, प्यारे !आ'ला हज़रत के पैकर में देखो, 'इश्क़-ए-अहमद का जल्वा मिलेगा

ग़ौस-ओ-ख़्वाजा की बेशक़ 'अता है, हिन्द में एक अहमद रज़ा हैअहल-ए-सुन्नत का जो मुक़्तदा है, वो बरेली में तुम को मिलेगा

हाथ मलते रहें मलने वाले, लाख जलते रहें जलने वालेग़ौस-ओ-ख़्वाजा के लुत्फ़-ओ-करम से आ'ला हज़रत का डंका बजेगा

जिन को बै'अत कर के मुर्शिद ख़ुद ही उन पर नाज़ करेंऐसा मुरीद-ए-सादिक़ बनना सब के बस की बात नहीं है

मेरे रज़ा सा मुर्शिद होना सब के बस की बात नहीं है

शौक़-ए-फ़रीदी ! उन का रुत्बा मेरी फ़िकर से बर-तर हैउन की शान-ओ-'अज़मत लिखना सब के बस की बात नहीं है

मेरे रज़ा सा मुर्शिद होना सब के बस की बात नहीं है

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