नात लिरिक्स

Mere Khwaja Ka Mela Aaya

मेरे ख़्वाजा का मेला आया

नात ख़्वान: हाफ़िज़ डॉ. निसार अहमद मार्फ़ानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़्वाजा पिया ! ख़्वाजा पिया ! ख़्वाजा पिया ! ख़्वाजा पिया !

अजमेर की सुंदर नगरी में, वलियों के राजा रहते हैंउस देस का, यारो ! क्या कहना ! जिस देस में ख़्वाजा रहते हैं

मेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आयामेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आया

ज़माना कुछ भी कहे, मेरा आसरा ख़्वाजापुकारता ही रहूँगा हमेशा, 'या ख़्वाजा'

मेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आयामेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आया

मुझे तो दीन भी, दुनिया भी उन के दर से मिलीज़माने भर की ख़ुशी उन की रह-गुज़र से मिलीक़दम क़दम पे हुए मेरे रहनुमा ख़्वाजापुकारता ही रहूँगा हमेशा, 'या ख़्वाजा'

मेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आयामेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आया

ज़माना यूँ ही तो कहता नहीं ग़रीब-नवाज़तमाम दुनिया में होती है आज नज़्र-ओ-नियाज़कि फ़ैज़-ए-'आम जो जारी है आप का, ख़्वाजा !पुकारता ही रहूँगा हमेशा, 'या ख़्वाजा'

मेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आयामेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आया

मैं लड़ रहा हूँ जो तूफ़ान-ए-ग़म की मौजों सेनिकल के आया हूँ बहर-ए-अलम की मौजों सेहैं मेरी कश्ती-ए-हस्ती के ना-ख़ुदा ख़्वाजापुकारता ही रहूँगा हमेशा, 'या ख़्वाजा'

मेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आयामेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आया

वही है फ़र्क़ शरी'अत में और तरीक़त मेंजो सिलसिला है अक़ीदत में और मोहब्बत मेंकोई भी शक्ल हो, हैं इस का आईना ख़्वाजापुकारता ही रहूँगा हमेशा, 'या ख़्वाजा'

मेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आयामेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आया

जिन्हें तलाश है हक़ की वो इस तरफ़ आएँहुज़ूर-ए-ख़्वाजा अक़ीदत के फूल बरसाएँरसूल से है ख़ुदा तक का सिलसिला ख़्वाजापुकारता ही रहूँगा हमेशा, 'या ख़्वाजा'

मेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आयामेरे ख़्वाजा का मेला आया, मेरे ख़्वाजा का मेला आया

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