नात लिरिक्स

Anmol Ye Ghadi Hai Ise Mat Ganwao Na | Pandra Sau Sala Jashn-e-Wiladat Manao Na

अनमोल ये घड़ी है इसे मत गँवाओ ना | पंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

नात ख़्वान: हाफ़िज़ डॉ. निसार अहमद मार्फ़ानीशायर: वसीम बेख़ुद माण्डलवी (इंडिया)उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सल्ला 'अलैका व सल्लमा, सल्ला 'अलैका व सल्लमा

हुब्बुन्नबी यजम'उनासल्ला 'अलैका व सल्लमाअशरक़न्नूरु बि-मीलादिल-मुख़्तारीसल्ला 'अलैका व सल्लमाबि-मवलिदिक या रसूलल्लाह'अम्म-स्सलामी, 'अम्म-स्सलामीबि-मवलिदिक या हबीबल्लाह'अम्म-स्सलामी, 'अम्म-स्सलामीया मन अर्सलहुल्लाह रहमतल-लिल-'आलमीन

सल्ला 'अलैका व सल्लमा, सल्ला 'अलैका व सल्लमा

जश्न-ए-विलादत मनाओ, दीवानो !जश्न-ए-विलादत मनाओ

निस्बत हुज़ूर से है तो फिर मुस्कुराओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

हर दिल में बस दुरूद की तम्हीद आज हैहर 'आशिक़-ए-रसूल की तो 'ईद आज है'इश्क़-ए-नबी का जाम सभी को पिलाओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

निस्बत हुज़ूर से है तो फिर मुस्कुराओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

रल मिल के मनाओ, सब ना'रे लाओआए सोहणे आक़ा, गलियाँ नूँ सजाओ

हर इक गली में देखिए इक नूर छा गयामीलाद की ख़ुशी में फ़लक झूमता गयागलियों को रहमतों का नगर तुम बनाओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

निस्बत हुज़ूर से है तो फिर मुस्कुराओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

मीलाद की बहार से मौसम बदल गयाआमद के नग़्मे सुन के हर इक दिल मचल गया

सल्ला 'अलैका या रसूलल्लाह !व सल्लिम 'अलैका या हबीबल्लाह !

अहल-व्व-सहलन मरहबा, या रसूलल्लाह !

मीलाद की बहार से मौसम बदल गयाआमद के नग़्मे सुन के हर इक दिल मचल गयामाहौल 'इश्क़ वाला हर इक सिम्त लाओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

निस्बत हुज़ूर से है तो फिर मुस्कुराओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

जश्न-ए-विलादत मनाओ, दीवानो !जश्न-ए-विलादत मनाओ

लब पर हो ना'त, आँख में अश्क-ए-नियाज़ होदिल में हुज़ूर के लिए उल्फ़त का साज़ होमीलाद की ख़ुशी का तराना सुनाओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

निस्बत हुज़ूर से है तो फिर मुस्कुराओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

आए हैं वो नबी जो सरापा जमाल हैंजिन के क़दम से औज पे हर बा-कमाल हैअनमोल ये घड़ी है इसे मत गँवाओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

निस्बत हुज़ूर से है तो फिर मुस्कुराओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

जश्न-ए-विलादत मनाओ, दीवानो !जश्न-ए-विलादत मनाओ

हम जिन के नाम-ए-नामी पे जानें लुटाएँगेबेख़ुद ! वोही तो ख़ुल्द में ले कर के जाएँगेतुम भी, निसार ! उन पे ही क़ुर्बान जाओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

निस्बत हुज़ूर से है तो फिर मुस्कुराओ नापंद्रह सौ साला जश्न-ए-विलादत मनाओ ना

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।