नात लिरिक्स

Mah-e-Taiba Nayyar-e-Batha Sallallahu Alaika Wa Sallam

माह-ए-तयबा नय्यर-ए-बतहा सल्लल्लाहु अलैका व सल्लम

नात ख़्वान: हाफ़िज़ डॉ. निसार अहमद मार्फ़ानीशायर: मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान (मुफ़्ती-ए-आज़म हिन्द)उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

माह-ए-तयबा नय्यर-ए-बतहा ! सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लमतेरे दम से 'आलम चमका, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

तू है मज़हर-ए-रब्ब-ए-अजमल, ज़िल हैं तेरे सारे मुरसलकौन है हम-सर तेरा, शाहा ! सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

तू है नाइब-ए-रब्ब-ए-अकबर, प्यारे हर दम तेरे दर परअहल-ए-हाजत का है मेला, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

हर शय में है तेरा जल्वा, तुझ से रौशन दीन-ओ-दुनियाबाँटा तू ने नूर का बाड़ा, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

तू चाहे वो जो रब चाहे, रब चाहे वो जो तू चाहेचाहा तेरा रब का चाहा, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

जितने सलातीं पहले आए, सिक्के उन के हो गए खोटेजारी रहेगा सिक्का तेरा, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

तेरे घर का बच्चा बच्चा सारा घराना, सय्यिद-ए-वाला !नूरी मूरत नूर का पुतला, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

मैं हूँ बेबस तू ही बस है, मैं हूँ बेकस तू ही कस हैकस ले कमर और बहर-ए-मदद आ, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

हाल हमारा जैसा ज़बूँ है और वो कैसा और वो क्यूँ हैसब है तुम पर रौशन, शाहा ! सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

अंत-अल-क़ासिम रब्बुका मु'अती, तुम ही ने सब को ने'मत दीदे दो मुझ को मेरा हिस्सा, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

हाज़िर-ए-दर है नूरी-ए-मुज़्तर, आप का ये मौरूसी सना-गरइब्न-ए-रज़ा है ख़्वाहाँ रज़ा का, सल्लल्लाहु 'अलैका व सल्लम

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।