नात लिरिक्स

Mere Khwaja Ka Dar Baqi Rahega

मेरे ख़्वाजा का दर बाक़ी रहेगा

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर अल-क़ादरीशायर: हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़्वाजा पिया मेरे ख़्वाजा पिया !ख़्वाजा पिया मेरे ख़्वाजा पिया !

दिल्ली राजस्थान तुम्हारा, या ख़्वाजा !सारा हिन्दुस्तान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

जग में वो सम्मान कभी न पाएगाजिस ने किया अपमान तुम्हारा, या ख़्वाजा !

मेरे ख़्वाजा का दर बाक़ी रहेगामिटाने वाला इक दिन ख़ुद मिटेगा

बिठाए ऊँट तो वो उठ न पाएकटोरे में समंदर को समाएजो नव्वे लाख को कलमा पढ़ाएबताओ वो भला कैसे मिटेगा

मेरे ख़्वाजा ! का दर बाक़ी रहेगामिटाने वाला इक दिन ख़ुद मिटेगा

मेरा ख़्वाजा यहाँ का हुक्मराँ हैउसी के दम से ये हिन्दुस्ताँ हैउसी का हिन्द में सिक्का रवाँ हैवो हाकिम है, सदा हाकिम रहेगा

मेरे ख़्वाजा ! का दर बाक़ी रहेगामिटाने वाला इक दिन ख़ुद मिटेगा

उन्हें भेजा है सुल्तान-ए-जहाँ ने'अली-ओ-फ़ातिमा के हैं वो प्यारेमेरे शब्बीर-ओ-शब्बर के दुलारेसदा उन का यहाँ सिक्का चलेगा

मेरे ख़्वाजा ! का दर बाक़ी रहेगामिटाने वाला इक दिन ख़ुद मिटेगा

यहाँ हिन्दू मुसलमाँ सिख हैं आतेमुरादें अपनी हैं वो पा के जातेये हिन्दुस्तानियों के हैं दुलारेयूँही उन का सदा चर्चा रहेगा

मेरे ख़्वाजा ! का दर बाक़ी रहेगामिटाने वाला इक दिन ख़ुद मिटेगा

यहाँ हिन्दू मुसलमाँ साथ रह करसलामी देते हैं ख़्वाजा को झुक करबिला-तफ़रीक़ सब क़ुर्बां हैं उन परकोई अजमेर का क्या कर सकेगा

मेरे ख़्वाजा ! का दर बाक़ी रहेगामिटाने वाला इक दिन ख़ुद मिटेगा

मिला, शौक़-ए-फ़रीदी ! उन से ईमाँमिली हिन्दुस्ताँ को उन से पहचाँजो उन से बुग़्ज़ रक्खे वो है नादाँसदा ख़्वाजा का दर रौशन रहेगा

मेरे ख़्वाजा ! का दर बाक़ी रहेगामिटाने वाला इक दिन ख़ुद मिटेगा

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