नात लिरिक्स

Mera Har Gham Mitane Ko Mera Allah Kafi Hai

मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

नात ख़्वान: अज़मत रज़ा भागलपुरीशायर: अज़मत रज़ा भागलपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी हैमेरी बिगड़ी बनाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

लहू मेरे जिगर का है उसी के फ़ज़्ल से जारीउसी की मेहरबानी से है साँसों की रवादारीमेरा जीवन बचाने को मेरा अल्लाह काफ़ी हैमेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

वही सब्ज़ा उगाता है, वही गुलशन सजाता हैअनाजों का शजर उस के करम से लहलहाता हैमुझे खाना खिलाने को मेरा अल्लाह काफ़ी हैमेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

समुंदर के लबों में और बल खाती घटाओं मेंवही तो बाँटता है रोज़ ताज़ा दम हवाओं मेंनया मौसम बनाने को मेरा अल्लाह काफ़ी हैमेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

हवाओं को चलाता है, वही बरसात लाता हैवही गेहूँ के पौधों में नई बाली उगाता हैमेरी खेती लगाने को मेरा अल्लाह काफ़ी हैमेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

वही दरिया में मूसा के लिए रस्ता बनाता हैवही यूनुस को मछली के शिकम में भी बचाता हैहर एक मंज़र दिखाने को मेरा अल्लाह काफ़ी हैमेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

चमकता है फ़लक पर चाँद, सूरज जगमगाता हैफ़लक के नीले पर्दों पर भी तारा टिमटिमाता हैरुख़-ए-'आलम सजाने को मेरा अल्लाह काफ़ी हैमेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

ये 'अज़मत ना'त पढ़ता है उसी की मेहरबानी सेक़सीदा गुनगुनाता है उसी की मेहरबानी सेमुझे शोहरत दिलाने को मेरा अल्लाह काफ़ी हैमेरा हर ग़म मिटाने को मेरा अल्लाह काफ़ी है

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