नात लिरिक्स

Meer-e-Baghdad Main Lachar Hun Shayian Lillah

मीर-ए-बग़दाद मैं लाचार हूँ शैअल-लिल्लाह

नात ख़्वान: अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मैं ख़ता-कार-ओ-गुनहगार हूँ, शैअल-लिल्लाहबंदा-ए-नफ़्स, सियाहकार हूँ, शैअल-लिल्लाहमुजरिम-ओ-बेकस-ओ-बे-यार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाहमीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

ज़िंदा-दरगोर हूँ, बीमार हूँ, शैअल-लिल्लाहपा-ब-ज़ंजीर-ओ-गिरफ़्तार हूँ, शैअल-लिल्लाहउस पे बे-दस्त हूँ, नादार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाहमीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

बंदा-ए-ईज़िद-ए-ग़फ़्फ़ार हूँ, शैअल-लिल्लाहउम्मत-ए-अहमद-ए-मुख़्तार हूँ, शैअल-लिल्लाहख़ाना-ज़ादों में मैं सरकार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाहमीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

गो ज़माने से हूँ बीमार, मरज़ है मुज़्मिनगो सताता है हमेशा से मुझे नफ़्स का जिनलब-कुशाई का इरादा भी किया गो हर दिनहाल-ए-दिल शर्म से अब तक न कहा था लेकिनआज मैं बर-सर-ए-इज़हार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

'उम्र जुर्मों में तो चालीस से ज़्यादा गुज़रीछा गई, आह ! मेरे हाल पे तीरा-बख़्तीक़ादरी कहते रहे फिर भी मुझे सब या'नीकरम-ए-ख़ास के लाइक़ नहीं मैं गो फिर भीआप का ग़ाशिया-बरदार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मुझ पे अब फ़िक़रे कसे जाते हैं कैसे कैसेपूछते मुझ से हैं तू जीता है किस के बरतेमैं तो, ऐ ग़ैरत-ए-जद ! थक गया सुनते सुनतेआप ही सुनिए कि अब और कहूँ मैं किस से ?बस तह-ए-दामन-ए-सरकार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

न कोई और तमन्ना है, न मक़्सद, न मफ़ादआरज़ू है तो यही और उसी की है याददेखूँ गर रू-ए-मुनव्वर तो कहूँ ज़िंदाबादजल्वा-ए-पाक नज़र आए तो बर आए मुरादतिश्ना-ए-शर्बत-ए-दीदार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मुझ को मा'लूम है मैं क्या हूँ ज़लूम और जहूलन मैं साइल किसी लाइक़ हूँ, न मेरा मसऊलऔर मेरी 'अर्ज़-ए-तमन्ना भी है क्या ख़ाक है धूलमेरा क्या मुँह है कि हो मेरी दु'आ भी मक़बूलमैं कि इक फ़र्द-ए-गुनहगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

अपनी ना-अहली भी महसूस हो अपनी ज़िल्लतदिल भी शर्मिंदा हो और तारी हो ख़ौफ़-ओ-वहशतया'नी कुछ देर को हो जाइए सय्यद सूरतग़ौस के दर से न ले जाओगे, हसरत ! हसरतबस कहो, हाज़िर-ए-दरबार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

देख लो सय्यद-ए-लाचार की सूरत, हालतइस पे हज़रत की रहा करती है शफ़क़त, रहमतया'नी जब बंदा-नवाज़ी ही है 'आदत, सीरतग़ौस के दर से न ले जाओगे, हसरत ! हसरतबस कहो, हाज़िर-ए-दरबार हूँ, शैअल-लिल्लाह

मीर-ए-बग़दाद ! मैं लाचार हूँ, शैअल-लिल्लाहदस्त-गीरी का तलबगार हूँ, शैअल-लिल्लाह

यहीं पाता है हर इक साहिब-ए-हाजत हाजतक़ादरी जाए कहीं और तो ग़ैरत ग़ैरतमिस्ल-ए-सय्यद के करो ना'रा-ए-हज़रत हज़रतग़ौस के दर से न ले जाओगे, हसरत ! हसरतबस कहो, हाज़िर-ए-दरबार हूँ, शैअल-लिल्लाह

कलाम:हसरत मोहानी

तज़मीन:सय्यिद मुहम्मद अशरफ़ी जीलानीमुहद्दिस-ए-आ'ज़म-ए-हिन्द

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