नात लिरिक्स

Meem-e-Madina Marehra Ki Qismat Hai

मीम-ए-मदीना मारहरा की क़िस्मत है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: सय्यिद हसनैन मियाँ बरकातीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मीम-ए-मदीना मारहरा की क़िस्मत हैइस गुंबद को उस गुंबद से निस्बत है

गर्दिश-ए-दौराँ ! हट जा मेरे रस्ते सेमेरे सर पर दस्त-ए-शाह-ए-बरकत है

चिश्ती पैमाने में है बग़दाद की मयबरकत वाले साक़ी की ये बरकत है

शाह-ए-बरकत मेरे नाना-दादा हैंउन से मुझ को दोहरी दोहरी निस्बत है

इन के मुर्शिद इन के ऊपर नाज़ करेंहाँ हाँ ये भी शान-ए-आ'ला-हज़रत है

शहर-ए-बरेली ! तुझ पर फ़ज़्ल है नूरी काआज बना तू मर्कज़-ए-अहल-ए-सुन्नत है

ख़ाली झोली ले कर मँगता आए हैंहज़रत-ए-क़ासिम की जानिब से दा'वत है

दस्त-ए-करम दाता का लो अब उठता हैमाँगो माँगो दिल में जो भी हसरत है

मुर्शिद दामन भर भर कर लौटाएँगेयही तो उन की प्यारी प्यारी 'आदत है

देखो ये कैसा नूरानी चेहरा हैमुर्शिद का दीदार भी एक 'इबादत है

नज़्मी ! तुम भी पाँव पकड़ लो मुर्शिद केइन क़दमों के नीचे ही तो जन्नत है

याँ से जो ख़ाली लौटा ख़ाली ही रहाहाँ हाँ ऐसा शख़्स बड़ा बद-क़िस्मत है

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