नात लिरिक्स

Marham-e-Rooh-o-Jaan Madina Hai

मरहम-ए-रूह-ओ-जाँ मदीना है

नात ख़्वान: नूर आलम अत्तारी मदनीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मरहम-ए-रूह-ओ-जाँ मदीना हैमर्कज़-ए-दो-जहाँ मदीना है

ठोकरें दर-ब-दर की क्यूँ खाऊँमेरा दारुल-अमाँ मदीना है

गिरने वाले वहाँ सँभलते हैंक़ुव्वत-ए-बे-कसाँ मदीना है

कर लूँ हज फिर वहाँ तू पहुँचा देया इलाही ! जहाँ मदीना है

मुजरिमो ! बे-ख़तर चले आओजा-ए-अमन-ओ-अमाँ मदीना है

इस जगह क़िस्मतें सँवरती हैंमर्जा'-ए-इंस-ओ-जाँ मदीना है

खिल खिला कर न हँस, ज़ियादा न बोलशोर मत कर, यहाँ मदीना है

'इश्क़-ए-सरवर में आह-ओ-ज़ारी करजा-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ मदीना है

जिस को 'इश्क़ उन का मिल गया उस कादिल वहाँ है जहाँ मदीना है

ऐ मदीने को ढूँडने वालो !मैं बताऊँ कहाँ मदीना है

'आशिक़ान-ए-रसूल के दिल मेंफ़ज़्ल-ए-रब से निहाँ मदीना है

काश, या रब ! नबी के जल्वों मेंमौत आए जहाँ मदीना है

या ख़ुदा ! झूमता हुआ 'अत्तारफिर से पहुँचे जहाँ मदीना है

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