नात लिरिक्स

Marhaba Sad Marhaba Phir Aamad-e-Ramzan Hai | Marhaba Sad Marhaba Phir Aa Gaya Ramzan Hai

मरहबा सद मरहबा फिर आमद-ए-रमज़ान है | मरहबा सद मरहबा फिर आ गया रमज़ान है

नात ख़्वान: मौलाना बिलाल रज़ा अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मरहबा सद मरहबा ! फिर आमद-ए-रमज़ान हैखिल उठे मुरझाए दिल, ताज़ा हुआ ईमान है

या ख़ुदा ! हम 'आसियों पर ये बड़ा एहसान हैज़िंदगी में फिर 'अता हम को किया रमज़ान है

तुझ पे सदक़े जाऊँ, रमज़ाँ ! तू 'अज़ीमुश्शान हैतुझ में नाज़िल हक़ त'आला ने किया क़ुरआन है

अब्र-ए-रहमत छा गया है और समाँ है नूर नूरफ़ज़्ल-ए-रब से मग़्फ़िरत का हो गया सामान है

हर घड़ी रहमत भरी है, हर तरफ़ हैं बरकतेंमाह-ए-रमज़ाँ रहमतों और बरकतों की कान है

आ गया रमज़ाँ, 'इबादत पर कमर अब बाँध लोफ़ैज़ ले लो जल्द, ये दिन तीस का मेहमान है

'आसियों की मग़्फ़िरत का ले कर आया है पयामझूम जाओ, मुजरिमो ! रमज़ाँ मह-ए-ग़ुफ़रान है

भाइयो बहनो ! गुनाहों से सभी तौबा करोख़ुल्द के दर खुल गए हैं, दाख़िला आसान है

कम हुआ ज़ोर-ए-गुनह और मस्जिदें आबाद हैंमाह-ए-रमज़ान-उल-मुबारक का ये सब फ़ैज़ान है

रोज़ादारो ! झूम जाओ, क्यूँ-कि दीदार-ए-ख़ुदाख़ुल्द में होगा तुम्हें, ये वा'द-ए-रहमान है

दो जहाँ की ने'मतें मिलती हैं रोज़ादार कोजो नहीं रखता है रोज़ा वो बड़ा नादान है

या इलाही ! तू मदीने में कभी रमज़ाँ दिखामुद्दतों से दिल में ये 'अत्तार के अरमान है

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