नात लिरिक्स

Marhaba Aaj Chalenge Shah-e-Abrar Ke Paas

मरहबा आज चलेंगे शह-ए-अबरार के पास

नात ख़्वान: आरिफ़ अत्तारीशायर: मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मरहबा ! आज चलेंगे शह-ए-अबरार के पासइंशाअल्लाह, पहुँच जाएँगे सरकार के पास

पेश करने के लिए कुछ नहीं बद-कार के पासढेरों 'इस्याँ हैं गुनहगारों के सरदार के पास

मिल चुका इज़्न, मुबारक हो मदीने का सफ़रक़ाफ़िले वालो ! चलो चलते हैं सरकार के पास

ख़ूब रो रो के वहाँ ग़म का फ़साना कहनाग़म-ज़दो ! आओ चलो अहमद-ए-मुख़्तार के पास

मैं गुनहगार गुनाहों के सिवा क्या लातानेकियाँ होती हैं, सरकार ! निकोकार के पास

सर भी ख़म, आँख भी नम, शर्म से पानी पानीक्या करे नज़्र नहीं कुछ भी गुनहगार के पास

आँख जब गुंबद-ए-ख़ज़रा का नज़ारा कर लेदम निकल जाए मेरा आप की दीवार के पास

'अर्सा-ए-हश्र में जब रोता बिलकता देखारहम खाते हुए दौड़ आए वो बद-कार के पास

मुजरिमो ! इतना भी घबराओ न महशर में तुममिल के चलते हैं सभी अपने मददगार के पास

दोनों 'आलम की भलाई का सुवाली बन करइक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

शाह-ए-वाला ! ये मदीने का बने दीवानाइक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

अपना ग़म, चश्म-ए-नम और रिक़्क़त-ए-क़ल्बी दीजेइक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

उल्फ़त-ए-नाब मिले और दिल-ए-बेताब मिलेइक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

हुस्न-ए-अख़्लाक़ मिले भीक में इख़्लास मिलेइक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

इस्तिक़ामत इसे ईमाँ पे 'अता कर दीजेइक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

है मदीने में शहादत का ये मँगता, मौला !इक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

क़ब्र-ओ-महशर में अमाँ का है तलबगार, हुज़ूर !इक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

नार-ए-दोज़ख़ से रिहाई का मिले परवानाइक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

इस को जन्नत में जवार अपना 'अता कर दीजेइक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

आप से आप ही का है ये सुवाली, आक़ा !इक भिकारी है खड़ा आप के दरबार के पास

क़ब्र में यूँही, नकीरो ! नहीं आया, उन कीहै ग़ुलामी की सनद देख लो 'अत्तार के पास

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