नात लिरिक्स

Main So Jaun Ya Mustafa Kehte Kehte | Main So Jaon Ya Mustafa Kehte Kehte

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहते

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान नूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

हबीब-ए-ख़ुदा का नज़ारा करूँ मैंदिल-ओ-जान उन पर निसारा करूँ मैं

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

मुझे अपनी रहमत से तू अपना कर लेसिवा तेरे सब से किनारा करूँ मैं

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

ख़ुदा-रा ! अब आओ कि दम है लबों परदम-ए-वापसीं तो नज़ारा करूँ मैं

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

मुझे हाथ आए अगर ताज-ए-शाहीतेरी कफ़्श-ए-पा पर निसारा करूँ मैं

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

तेरा ज़िक्र लब पर, ख़ुदा दिल के अंदरयूँ ही ज़िंदगानी गुज़ारा करूँ मैं

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

दम-ए-वापसीं तक तेरे गीत गाउँमुहम्मद मुहम्मद पुकारा करूँ मैं

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

तेरे दर के होते कहाँ जाऊँ, प्यारे !कहाँ अपना दामन पसारा करूँ मैं

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

ख़ुदा ख़ैर से लाए वो दिन भी, नूरी !मदीने की गलियाँ बुहारा करूँ मैं

मैं सो जाऊँ या मुस्तफ़ा कहते कहतेखुले आँख सल्ले-'अला कहते कहते

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