नात लिरिक्स

Main Kis Munh Se Bolun, Huzoor Aap Ka Hun

मैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर आप का हूँ

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हुज़ूर ! आप का हूँ, मगर सोचता हूँमैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर ! आप का हूँगुनाहों के दरिया में डूबा हुआ हूँमैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर ! आप का हूँ

किया रब ने पैदा 'इबादत की ख़ातिरमोहब्बत 'अता की इता'अत की ख़ातिरज़माने के चक्कर में फिर भी फँसा हूँमैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर ! आप का हूँ

बहुत चाहता हूँ, मदीने में आऊँवहाँ आ के पलकों से झाड़ू लगाऊँमगर कैसे आऊँ, बहुत ही बुरा हूँमैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर ! आप का हूँ

मेरे वास्ते आप रातों को रोएकभी चैन से एक पल भी न सोएयहाँ चैन से रोज़ मैं सो रहा हूँमैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर ! आप का हूँ

हराम और हलाल आप ने सब बतायाहर इक राज़-ए-हस्ती से पर्दा उठायामैं सब जान कर भी बुरा बन गया हूँमैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर ! आप का हूँ

हसद, झूट, ग़ीबत समाई है मुझ मेंज़माने की सारी बुराई है मुझ मेंबहुत तौबा करता हूँ, फिर तोड़ता हूँमैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर ! आप का हूँ

हुज़ूर ! अपने मद्दाह की लाज रखिएहै जावेद मेरा, ख़ुदा से ये कहिएगुनहगार हूँ, मुँह छुपाए खड़ा हूँमैं किस मुँह से बोलूँ, हुज़ूर ! आप का हूँ

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