नात लिरिक्स

Mahboob Ke Dar Par Jaun Wo Waqt-e-Mubarak Aaye

महबूब के दर पर जाऊँ वो वक़्त-ए-मुबारक आए

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

महबूब के दर पर जाऊँ, वो वक़्त-ए-मुबारक आएतक़दीर अपनी चमकाऊँ, वो वक़्त-ए-मुबारक आए

जब पेश-ए-नज़र हों मेरे, मीनार-ओ-गुंबद तेरेमैं ग़श खा कर गिर जाऊँ, वो वक़्त-ए-मुबारक आए

फिर ज़ेर-ए-गुंबद-ए-ख़ज़रा, रो रो के दस्त-बस्तासब हाल मैं उन को सुनाऊँ, वो वक़्त-ए-मुबारक आए

दिल को अपने समझा कर, दीदार की आस दिला कररो रो के मैं सो जाऊँ, वो वक़्त-ए-मुबारक आए

वो ख़्वाब में मेरे आएँ, ऐ काश ! करम फ़रमाएँमैं क़दमों में गिर जाऊँ, वो वक़्त-ए-मुबारक आए

है दिल का, 'उबैद ! ये अरमाँ, फिर बन कर उन का मेहमाँदरबार में ना'त सुनाऊँ, वो वक़्त-ए-मुबारक आए

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