नात लिरिक्स

Madine Ke Zaair Salaam Un Se Kehna

मदीने के ज़ाइर सलाम उन से कहना

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीने के ज़ाइर ! सलाम उन से कहनातड़पते हैं तेरे ग़ुलाम, उन से कहना

हो जब सामने सब्ज़-गुंबद तुम्हारेनिहायत 'अक़ीदत से दामन पसारेहै हाज़िर तुम्हारा ग़ुलाम, उन से कहना

मदीने के ज़ाइर ! सलाम उन से कहनातड़पते हैं तेरे ग़ुलाम, उन से कहना

बड़ी चाहतों से है इस दर को पायापड़ा ही रहूँ, दर न छूटे तुम्हारान जाऊँगा अब तिश्ना-काम, उन से कहना

मदीने के ज़ाइर ! सलाम उन से कहनातड़पते हैं तेरे ग़ुलाम, उन से कहना

फिरें कब तलक दर-ब-दर बे-ठिकानेकहाँ जाएँ हम अपने दिल की सुनानेतुम्ही तो बनाते हो काम, उन से कहना

मदीने के ज़ाइर ! सलाम उन से कहनातड़पते हैं तेरे ग़ुलाम, उन से कहना

इसी आरज़ू में गुज़रते रहे दिनकि पहुँचें दयार-ए-नबी हम भी लेकिननहीं है कोई इंतिज़ाम, उन से कहना

मदीने के ज़ाइर ! सलाम उन से कहनातड़पते हैं तेरे ग़ुलाम, उन से कहना

गुमा इस तरह, आक़ा ! अपनी विला मेंख़ुमार-ए-मोहब्बत हो हर इक अदा मेंयूँही हो बसर सुब्ह-ओ-शाम, उन से कहना

मदीने के ज़ाइर ! सलाम उन से कहनातड़पते हैं तेरे ग़ुलाम, उन से कहना

शरी'अत पे उठे मेरा जो क़दम होवज़ीफ़ा तेरे नाम का दम-ब-दम होये हो उम्र यूँही तमाम, उन से कहना

मदीने के ज़ाइर ! सलाम उन से कहनातड़पते हैं तेरे ग़ुलाम, उन से कहना

दिखा दो अनस को वो दिलकश नज़ारेतरसते हैं जिन को मुसलमान सारेये बातें ब-सद-एहतिराम, उन से कहना

मदीने के ज़ाइर ! सलाम उन से कहनातड़पते हैं तेरे ग़ुलाम, उन से कहना

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