नात लिरिक्स

Madine Ke Wali Do Aalam Ke Data | Meri Bhi Nazar Soo-e-Taiba Lagi Hai

मदीने के वाली दो आलम के दाता | मेरी भी नज़र सू-ए-तयबा लगी है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीने के वाली ! दो 'आलम के दाता !मेरी भी नज़र सू-ए-तयबा लगी हैमैं मोहताज हूँ इक निगाह-ए-करम कातुम्हारे करम पर मेरी ज़िंदगी है

है वादी-ए-ऐमन पे ख़ालिक़ की रहमतमुसल्लम है बैत-उल-मुक़द्दस की 'अज़मतमगर क़ल्ब-ए-मुज़्तर को है जिस की हाजतवो, सुल्तान-ए-तयबा ! तुम्हारी गली है

तुम्हारे ही टुकड़ों पे मेरा गुज़ारातुम्हारे ही दरबार का हूँ मैं मँगताजो तुम से न माँगूँ तो फिर किस से माँगूँतुम्हारा तो सारा घराना सख़ी है

यहाँ रह के जीना है मरने से बद-तरवहाँ जा के मरना है जीने से बेहतरमुयस्सर जो हो उन के क़दमों में रह करवोही ज़िंदगी अस्ल में ज़िंदगी है

फ़क़ीरी का मुझ में नहीं है सलीक़ान आता है कुछ माँगने का तरीक़ाजो तुझ से न माँगूँ तो फिर किस से माँगूँतुम्हारे करम पर मेरी ज़िंदगी है

मदीने की राहों पर सदक़े दिल-ओ-जाँमदीने की गलियों पे सौ जाँ से क़ुर्बांनुजूम-ए-फ़लक को कहाँ वो मुयस्सरमदीने के ज़र्रों में जो दिल-कशी है

हज़ारो ही मय-ख़्वार तयबा में जा करशब-ओ-रोज़ पीते हैं 'इरफ़ाँ के सागरनहीं कोई जाता है तिश्ना, सिकंदर !ये साक़ी-ए-क़ौसर की दरिया-दिली है

बना लें जिसे अपना महबूब-ए-दावरतो बिगड़ी भी बन जाए उस की, सिकंदर !निगाह-ए-करम उन की पड़ जाए जिस परसमझ लो के खोटी भी उस की खरी है

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