नात लिरिक्स

Madine Ke Wali Madine Bula Lo | Ye Paigham Le Ja Saba Jaate Jaate

मदीने के वाली मदीने बुला लो | ये पैग़ाम ले जा सबा जाते जाते

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा क़ादरीशायर: मौलाना अब्दुल सत्तार नियाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मदीने के वाली ! मदीने बुला लो, ये पैग़ाम ले जा सबा जाते जातेहाँ, पैग़ाम लाना मेरी हाज़िरी का, बराह-ए-करम मेहरबाँ आते आते

तेरे दर पे आऊँ मैं बन कर सवाली, रहे सामने तेरे रौज़े की जालीग़रीबों के मौला ! यतीमों के वाली ! बड़ी देर कर दी बुलाते बुलाते

इधर भी निगाह-ए-करम हो ख़ुदा-रा, कभी तो मुक़द्दर का चमके सितारामेरी 'उम्र गुज़रे तेरी बारगाह में दु'आओं का दामन बिछाते बिछाते

मैं तेरी सख़ावत पे क़ुर्बान जाऊँ, मैं क्यूँ ना तेरे दर पे दामन बिछाऊँतेरे हाथ थकते नहीं, कमली वाले ! करम के ख़ज़ानें लुटाते लुटाते

कभी ख़ाना-ए-दिल में तशरीफ़ लाएँ, बड़ी देर से मुंतज़िर हैं निगाहेंबड़ा साथ मेरा दिया आँसुओं ने मेरे दिल का आँगन सजाते सजाते

मुक़द्दर में मेरी वो नूरी घड़ी हो, फ़ज़ा-ए-हरम हो, दयार-ए-नबी होदर-ए-मुस्तफ़ा पर मेरी हाज़िरी हो, नदामत के आँसू बहाते बहाते

हैं रश्क-ए-मह-ओ-मेहर अब तक वो ज़र्रे, दिल-ओ-जान क़ुर्बान उन रास्तों केजिन्हों ने हैं चूमे क़दम मुस्तफ़ा के, कभी आते आते कभी जाते जाते

बहुत ही कठिन हैं मोहब्बत की राहें, क़दम डगमगाएँ न बहकें निगाहेंकरे दस्तगीरी करम गर तुम्हारा, गुज़र जाऊँ दामन बचाते बचाते

निगाहों में हो सब्ज़-गुंबद के जल्वे, लबों पर हों तेरी 'इनायत के नग़्मेशब-ओ-रोज़ गुज़रें नियाज़ी के, आक़ा ! तेरा ज़िक्र-ए-अनवर सुनाते सुनाते

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