नात लिरिक्स

Lab Pe Salle Ala Ke Tarane Ashk Aankhon Mein Aaye Hue Hain

लब पे सल्ले-अला के तराने अश्क आँखों में आए हुए हैं

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुहम्मद अली ज़हूरी क़सूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लब पे सल्ले-'अला के तराने, अश्क आँखों में आए हुए हैंये हवा ये फ़ज़ा कह रही है, आक़ा तशरीफ़ लाए हुए हैं

हर-सू चर्चा है ख़ैर-उल-वरा का, जश्न-ए-मीलाद है मुस्तफ़ा कानूर है ये हबीब-ए-ख़ुदा का, रास्ते जगमगाए हुए हैं

जिन की ख़ातिर ये 'आलम बनाया, 'अर्श पर जिन को रब ने बुलायाऐ हलीमा ! ये तेरा मुक़द्दर, वो तेरे घर में आए हुए हैं

मैं मदीने की गलियों पे क़ुर्बां, जिन से गुज़रे हैं शाह-ए-मदीनाइस तरह से महकते हैं रस्ते, 'इत्र जैसे लगाए हुए हैं

नाम नबियों के बेशक बड़े हैं, 'अज़मतों के नगीने जड़े हैंमुक़तदी बन के पीछे खड़े हैं, वो जो पहले से आए हुए हैं

झुक रहा है फ़लक भी ज़मीं भी, ऐसी चौखट न देखी कहीं भीजिस जगह जिब्राईल-ए-अमीं भी अपनी गर्दन झुकाए हुए हैं

दर खुले उन की जूद-ओ-सख़ा के, फ़ैज़ जारी हैं लुत्फ़-ओ-'अता केआएँ दरबार में मुस्तफ़ा के, जो भी ग़म के सताए हुए हैं

ज़िंदगी दूर रह के अधूरी, हसरत-ए-दीद कब होगी पूरीअपनी पलकों पे हम भी, ज़हूरी ! चंद आँसू सजाए हुए हैं

आज पूरी हुई दिल की हसरत, क्यूँ न जी भर के कर लूँ ज़ियारतक़ब्र में अपना जल्वा दिखाने मेरे सरकार आए हुए हैं

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