नात लिरिक्स

Lab Pe Jab Naam-e-Muhammad Ki Sada Aati Hai

लब पे जब नाम-ए-मुहम्मद की सदा आती है

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वीशायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माईल वास्ती क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लब पे जब नाम-ए-मुहम्मद की सदा आती हैउन के दरबार से रहमत की घटा आती है

हिज्र-ए-सरकार के ग़म में जो क़ज़ा आती हैउस कफ़न के लिए जन्नत से रिदा आती है

मर गया 'इश्क़-ए-मुहम्मद जो बसा कर दिल मेंक़ब्र में उस की मदीने से हवा आती है

क़ब्र में बोले नकीरैन कि सोने दो इसेइस की रग रग से हमें बू-ए-वफ़ा आती है

उन का बीमार हूँ छेड़ो न, तबीबो ! मुझ कोमेरी हर रोज़ मदीने से दवा आती है

भीनी ख़ुश्बू से महक जाती हैं गलियाँ, गुलज़ार !उन के रौज़े से लिपट कर जो सबा आती है

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