नात लिरिक्स

Kash Ek Roz Ghar Mere Ghausul Wara Aap Tashreef Layein To Kya Poochhna

काश इक रोज़ घर मेरे ग़ौस-उल-वरा आप तशरीफ़ लाएँ तो क्या पूछना

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वीशायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माईल वास्ती क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

काश ! इक रोज़ घर मेरे, ग़ौस-उल-वरा !आप तशरीफ़ लाएँ तो क्या पूछनाअपने नूरानी क़दमों से घर को मेरेआ के जन्नत बनाएँ तो क्या पूछना

ग़ौस-ए-आ'ज़म ने मुझ पे करम ये कियामुझ से 'आसी को रौज़े पे बुलवा लियाअब इन्हीं जालियों में मुझे एक दिनअपना जल्वा दिखाएँ तो क्या पूछना

एक दिन जब सजे महफ़िल-ए-मुस्तफ़ाग़ौस-ए-आ'ज़म हों और हों सभी औलियामैं पढ़ूँ झूम के ना'त सरकार कीसुन के वो मुस्कुराएँ तो क्या पूछना

ये जिगर हो या सर हो या हो चश्म-ए-नमआप ने तो किए हैं सभी पे करमअब ज़रा मेरे दिल पे भी रख दें क़दमदिल मेरा जगमगाए तो क्या पूछना

जाम 'इरफ़ान का बहर-ए-'इरफ़ान सेक़ुत्ब-ओ-अब्दाल आते हैं पीने जिसेकाश गुलज़ार ! मुझ को भी इक दिन वहीजाम भर कर पिलाएँ तो क्या पूछना

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