नात लिरिक्स

Har Nazar Kanp Uthegi Mehshar Ke Din | Khauf Se Har Kaleja Dahal Jayega

हर नज़र काँप उट्ठेगी महशर के दिन | ख़ौफ़ से हर कलेजा दहल जाएगा

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वीशायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हर नज़र काँप उट्ठेगी महशर के दिन, ख़ौफ़ से हर कलेजा दहल जाएगापर ये नाज़ उन के बंदे का देखेंगे सब, थाम कर उन का दामन मचल जाएगा

मौज कतरा के हम से चली जाएगी, रुख़ मुख़ालिफ़ हवा का बदल जाएगाजब इशारा करेंगे वो नाम-ए-ख़ुदा, अपना बेड़ा भँवर से निकल जाएगा

यूँ तो जीता हूँ हुक्म-ए-ख़ुदा से मगर, मेरे दिल की है उन को यक़ीनन ख़बरहासिल-ए-ज़िंदगी होगा वो दिन मेरा, उन के क़दमों पे जब दम निकल जाएगा

रब्ब-ए-सल्लिम वो फ़रमाने वाले मिले, क्यूँ सताते हैं, ऐ दिल ! तुझे वसवसेपुल से गुज़रेंगे हम वज्द करते हुए, कौन कहता है पाँव फिसल जाएगा

अख़्तर-ए-ख़स्ता ! क्यूँ इतना बेचैन है ? तेरा आक़ा शहंशाह-ए-कौनैन हैलौ लगा तो सही शाह-ए-लौलाक से, ग़म मसर्रत के साँचे में ढल जाएगा

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