नात लिरिक्स

Imamon Mein Ek Imam-e-Bartar Imam-e-Jafar Imam-e-Jafar

इमामों में इक इमाम-ए-बरतर इमाम-ए-जाफ़र इमाम-ए-जाफ़र

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वीशायर: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इमामों में इक इमाम-ए-बरतर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम जा'फ़र'अली के गुलशन के हैं गुल-ए-तर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-जा'फ़र

वो लख़्त-ए-जिगर-ए-बतूल भी हैं, वो बाग़-ए-ज़हरा के फूल भी हैंशुजा'अतों के 'अज़ीम पैकर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-जा'फ़र

इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा तुम्हारी सोहबत से बहरा-वर थेवो करते थे इस का ज़िक्र अक्सर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र !

तुम्हारी 'इज़्ज़त, तुम्हारी शोहरत, तुम्हारी 'अज़मत, तुम्हारी रिफ़'अतनियाज़ तेरी हो क्यूँ न घर-घर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र !

वसी पे नज़र-ए-करम ख़ुदा-रा, नसब की निस्बत की लाज रख लेहर एक मंज़िल के तुम हो रहबर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र !

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