नात लिरिक्स

Kyun Kar Na Mere Dil Mein Ho Ulfat Rasool Ki

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: ओवैस रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल कीजन्नत में ले के जाएगी चाहत रसूल की

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की

चलता हूँ मैं भी, क़ाफ़िले वालो ! रुको ज़रामिलने दो बस मुझे भी इजाज़त रसूल की

जन्नत में ले के जाएगी चाहत रसूल की

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की

पूछें जो दीन-ओ-ईमाँ नकीरैन क़ब्र मेंउस वक़्त मेरे लब पे हो मिदहत रसूल की

जन्नत में ले के जाएगी चाहत रसूल की

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की

क़ब्र में सरकार आएँ तो मैं क़दमों में गिरूँगर फ़रिश्ते भी उठाएँ तो मैं उन से यूँ कहूँअब तो पा-ए-नाज़ से मैं, ऐ फ़रिश्तो ! क्यूँ उठूँ ?मर के पहुँचा हूँ यहाँ इस दिलरुबा के वास्ते

तड़पा के उन के क़दमों में मुझ को गिरा दे शौक़जिस वक़्त हो लहद में ज़ियारत रसूल की

जन्नत में ले के जाएगी चाहत रसूल की

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की

सरकार ने बुला के मदीना दिखा दियाहोगी मुझे नसीब शफ़ा'अत रसूल की

जन्नत में ले के जाएगी चाहत रसूल की

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की

या रब ! दिखा दे आज की शब जल्वा-ए-हबीबइक बार तो 'अता हो ज़ियारत रसूल की

इन आँखों का वर्ना कोई मसरफ़ ही नहीं हैसरकार ! तुम्हारा रुख़-ए-ज़ेबा नज़र आए

या रब ! दिखा दे आज की शब जल्वा-ए-हबीबइक बार तो 'अता हो ज़ियारत रसूल की

जन्नत में ले के जाएगी चाहत रसूल की

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की

तू है ग़ुलाम उन का, 'उबैद-ए-रज़ा ! तेरेमहशर में होगी साथ हिमायत रसूल की

जन्नत में ले के जाएगी चाहत रसूल की

क्यूँकर न मेरे दिल में हो उल्फ़त रसूल की

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