नात लिरिक्स

Kuchh Aisa Kar De Mere Kirdgar Aankhon Mein

कुछ ऐसा कर दे मेरे किर्दगार आँखों में

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान नूरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कुछ ऐसा कर दे, मेरे किर्दगार ! आँखों मेंहमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में

न कैसे ये गुल-ओ-गुंचे हों ख़्वार आँखों मेंबसे हुए हैं मदीने के ख़ार आँखों में

बसा हुआ है कोई गुल-'अज़ार आँखों मेंखिला है चार तरफ़ लाला-ज़ार आँखों में

वो नूर दे, मेरे परवरदिगार ! आँखों मेंकि जल्वा-गर रहे रुख़ की बहार आँखों में

बसर के साथ बसीरत भी ख़ूब रौशन होलगाऊँ ख़ाक-ए-क़दम बार बार आँखों में

उन्हें न देखा तो किस काम की हैं ये आँखेंकि देखने की है सारी बहार आँखों में

नज़र में कैसे समाएँगे फूल जन्नत केकि बस चुके हैं मदीने के ख़ार आँखों में

अजब नहीं कि लिखा लौह का नज़र आएजो नक़्श-ए-पा का लगाऊँ ग़ुबार आँखों में

करम ये मुझ पे किया है मेरे तसव्वुर नेकि आज खींच दी तस्वीर-ए-यार आँखों में

फ़रिश्तो ! पूछते हो मुझ से किस की उम्मत होलो देख लो, ये है तस्वीर-ए-यार आँखों में

पिया है जाम-ए-मोहब्बत जो आप ने, नूरी !हमेशा इस का रहेगा ख़ुमार आँखों में

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