नात लिरिक्स

Koo-e-Janan Mein Yaar Ja Na Saka

कू-ए-जानाँ में यार जा न सका

नात ख़्वान: ज़ाकिर इस्माईलीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कू-ए-जानाँ में, यार ! जा न सकाज़ख़्म दिल के उन्हें दिखा न सका

साँस थी आख़री मेरी उस दमदास्तान-ए-अलम सुना न सका

इक फ़क़त उस मदीने वाले केनाज़ मेरे कोई उठा न सका

जुर्म इतने थे बा-ख़ुदा मेरेकोई उन के सिवा छुपा न सका

जिस ने देखा वो गुंबद-ए-ख़ज़राअपनी नज़रों को फिर हटा न सका

दाग़-ए-'इस्याँ हैं इतने चेहरे पररुख़ से पर्दा कभी हटा न सका

तज़्किरा कब हुआ था कर्बल काआज तक मैं उसे भुला न सका

उस को कहते हैं फ़ातमा ज़हराजिस पे उँगली कोई उठा न सका

जैसा असग़र ने तीर खाया हैतीर ऐसा कोई भी खा न सका

सुन के ख़ुत्बा वो हुर्र चले आएख़ुल्द में तो यज़ीद आ न सका

जाने क्या होगा तेरा महशर मेंनज्दिया गर उन्हें मना न सका

ये करम है मेरे रज़ा खाँ कासुन्नियत को कोई हिला न सका

ज़ात-ए-अख़्तर रज़ा के जैसी अभीये ज़माना मिसाल ला न सका

कोशिशें कीं बहुत ज़माने नेशम'-ए-ईमाँ मेरी बुझा न सका

'इश्क़ सीने में है मुक़ीम उन कादिल तो दुनिया से मैं लगा न सका

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