नात लिरिक्स

Koi Sau Baar Poochhe Main Kahun Har Baar Kafi Hai

कोई सौ बार पूछे मैं कहूँ हर बार काफ़ी है

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वीशायर: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कोई सौ बार पूछे, मैं कहूँ हर बार काफ़ी हैमैं दीवाना हूँ, मुझ को बस तेरा दीदार काफ़ी है

मसीहा-ए-ज़माना ने किया वापस मुझे कह करमरीज़-ए-यार ! जा तुझ को निगाह-ए-यार काफ़ी है

पहुँच कर तेरी चौखट पर तेरा दीवाना कहता हैमुझे जन्नत से क्या लेना, तेरा दरबार काफ़ी है

ज़माने के हर इक मरहब को मिट्टी में मिलाना होसर-ए-मैदाँ ख़याल-ए-हैदर-ए-कर्रार काफ़ी है

लिखी ना'त-ए-नबी फाँसी का फंदा चूम कर जिस नेवो हिन्दुस्तान का शा'इर क़तील-ए-दार काफ़ी है

सिखाया जो वज़ीफ़ा वालिदा ने ग़ौस-ए-आ'ज़म कोग़ुलामो ! काफ़ी काफ़ी की यही तकरार काफ़ी है

जो ग़द्दार-ए-नबी को ज़ेर करना हो, वसी ! फिर तोइमाम अहमद रज़ा के नाम का इक वार काफ़ी है

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