कोई नबी नहीं है मेरे मुस्तफ़ा के बा'दशेर-ए-ख़ुदा नहीं है अली मुर्तज़ा के बा'द
कोई नबी नहीं है मेरे मुस्तफ़ा के बा'द
न ही किसी के बेटे हुसैन-ओ-हसन से औरन फ़ातिमा सी माँ है कोई फ़ातिमा के बा'द
कोई नबी नहीं है मेरे मुस्तफ़ा के बा'द
जैसी पढ़ी हुसैन ने तीरों की छाँव मेंऐसी नमाज़ फिर न हुई कर्बला के बा'द
कोई नबी नहीं है मेरे मुस्तफ़ा के बा'द
अब्बास ! तेरे नाम को मैं अपने इश्क़ सेपहले वफ़ा के लिखूँ या लिखूँ वफ़ा के बा'द
कोई नबी नहीं है मेरे मुस्तफ़ा के बा'द
शब्बीर कह के भाई बुलाते रहे जिसेहुर और क्या सवाल करे इस अता के बा'द
कोई नबी नहीं है मेरे मुस्तफ़ा के बा'द
दरबार-ए-शाम में कहा ज़ैनब ने, सुन यज़ीदडरते नहीं किसी से भी हम तो ख़ुदा के बा'द
कोई नबी नहीं है मेरे मुस्तफ़ा के बा'द
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