नात लिरिक्स

Kis Ke Jalwe Ki Jhalak Hai Ye Ujala Kya Hai

किस के जल्वे की झलक है ये उजाला क्या है

नात ख़्वान: ओवैस रज़ा क़ादरीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

किस के जल्वे की झलक है ये उजाला क्या हैहर तरफ़ दीदा-ए-हैरत-ज़दा तकता क्या है

माँग मन मानती मुँह माँगी मुरादें लेगान यहाँ "ना" है, न मँगता से ये कहना "क्या है"

पंद कड़वी लगे नासेह से तुर्श हो, ऐ नफ़्स !ज़हर-ए-'इस्याँ में, सितमगर ! तुझे मीठा क्या है

हम हैं उन के, वो हैं तेरे तो हुए हम तेरेइस से बढ़ कर तेरी सम्त और वसीला क्या है

उन की उम्मत में बनाया, उन्हें रहमत भेजायूँ न फ़रमा कि तेरा रहम में दा'वा क्या है

सदक़ा प्यारे की हया का कि न ले मुझ से हिसाबबख़्श बे पूछे लजाए को लजाना क्या है

ज़ाहिद उन का मैं गुनहगार वो मेरे शाफ़े'इतनी निस्बत मुझे क्या कम है तू समझा क्या है

बेबसी हो जो मुझे पुर्सिश-ए-आ'माल के वक़्तदोस्तो ! क्या कहूँ उस वक़्त तमन्ना क्या है

काश ! फ़रियाद मेरी सुन के ये फ़रमाएँ हुज़ूरहाँ कोई देखो ये क्या शोर है ग़ौग़ा क्या है

कौन आफ़त-ज़दा है, किस पे बला टूटी हैकिस मुसीबत में गिरिफ़्तार है सदमा क्या है

किस से कहता है कि लिल्लाह ख़बर लीजे मेरीक्यूँ है बेताब ये बेचैनी का रोना क्या है

इस की बेचैनी से है ख़ातिर-ए-अक़्दस पे मलालबेकसी कैसी है पूछो कोई गुज़रा क्या है

यूँ मलाइक करें मा'रूज़ कि इक मुजरिम हैउस से पुर्सिश है, बता तू ने किया क्या क्या है ?

सामना क़हर का है, दफ़्तर-ए-आ'माल हैं पेशडर रहा है कि ख़ुदा हुक्म सुनाता क्या है

आप से करता है फ़रियाद कि या शाह-ए-रुसुल !बंदा बेकस है, शहा ! रहम में वक़्फ़ा क्या है

अब कोई दम में गिरिफ़्तार-ए-बला होता हूँआप आ जाएँ तो क्या ख़ौफ़ है खटका क्या है

सुन के ये 'अर्ज़ मेरी बहर-ए-करम जोश में आएयूँ मलाइक को हो इर्शाद "ठहरना क्या है"

किस को तुम मूरीद-ए-आफ़ात किया चाहते हो !हम भी तो आ के ज़रा देखें तमाशा क्या है

उन की आवाज़ पे कर उट्ठुँ मैं बेसाख़्ता शोरऔर तड़प कर ये कहूँ अब मुझे पर्वा क्या है

लो वो आया मेरा हामी मेरा ग़म-ख़्वार-ए-उमम !आ गई जाँ तन-ए-बे-जाँ में ये आना क्या है

फिर मुझे दामन-ए-अक़्दस में छुपा लें सरवरऔर फ़रमाएँ हटो इस पे तक़ाज़ा क्या है

बंदा आज़ाद-शुदा है ये हमारे दर काकैसा लेते हो हिसाब इस पे तुम्हारा क्या है

छोड़ कर मुझ को फ़रिश्ते कहें महकूम हैं हमहुक्म-ए-वाला की न ता'मील हो ज़हरा क्या है

ये समाँ देख के महशर में उठे शोर कि वाहचश्म-ए-बद दूर हो, क्या शान है रुत्बा क्या है

सदक़े इस रहम के, इस साया-ए-दामन पे निसारअपने बंदे को मुसीबत से बचाया क्या है

ऐ रज़ा ! जान-ए-'अनादिल तेरे नग़्मों के निसारबुलबुल-ए-बाग़-ए-मदीना तेरा कहना क्या है

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।