नात लिरिक्स

Ki Jannati Hain Jannati Sayyidi Muawiya

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मुआविया

नात ख़्वान: हाफ़िज़ अहसन क़ादरीशायर: हाफ़िज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जन्नती जन्नती हज़रत-ए-मु'आविया

अमीर-उल-मोमिनीन ! मु'आविया मु'आविया !सहाबी-ए-रसूल ! मु'आविया मु'आविया !कातिब-ए-वही ! मु'आविया मु'आविया !ख़ालुल-मोमिनीन ! मु'आविया मु'आविया !मुहिब्ब-ए-अहल-ए-बैत ! मु'आविया मु'आविया !

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आवियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

ख़ुदा का इन पे फ़ज़्ल है, ख़ुदा की इन पे रहमतेंहैं फ़ज़्ल-ए-रब से बा-ख़ुदा जन्नती मु'आविया

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आवियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

'अली का मैं ग़ुलाम हूँ, मु'आविया से प्यार हैइसी मुनासिबत से ही तो अपना बेड़ा पार है'अली के सच्चे 'आशिक़ों के लब पे है यही सदाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आवियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

यही 'अक़ीदा है नबी के 'आशिक़ो का बा-ख़ुदाकि जन्नती हैं जन्नती हैं सय्यिदि मु'आवियाये ज़िंदगी है जब तलक कहेंगे हम ये बरमलाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आवियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

नबी की आल-ए-पाक से भी उन की थी क़राबतेंवो चार यारों से भी दिल में रखते थे मोहब्बतेंतमाम औलिया-ए-पाक ने भी बरमला कहाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आवियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

अमीर-उल-मोमिनीन ! मु'आविया मु'आविया !सहाबी-ए-रसूल ! मु'आविया मु'आविया !कातिब-ए-वही ! मु'आविया मु'आविया !ख़ालुल-मोमिनीन ! मु'आविया मु'आविया !मुहिब्ब-ए-अहल-ए-बैत ! मु'आविया मु'आविया !

ख़ुदा-ए-दो-जहाँ की हैं रज़ा मेरे मु'आवियावो रूठ जाएँ गर तो रूठ जाएँ प्यारे मुस्तफ़ाअगर वो ख़ुश रहें तो होंगे ख़ुश हबीब-ए-किब्रियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आवियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

मु'आविया पे हों ख़ुदा की रहमतें हज़ार बारयज़ीदियत पे हों ख़ुदा की ला'नतें हज़ार बारतमाम पंजतन के 'आशिक़ों की है यही सदाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आवियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

मु'आविया का ज़िक्र हम करेंगे यूँही ता-हयातये निस्बतें, ऐ शौक़-ए-क़ादरी ! हैं तोशा-ए-निजातबदन में जाँ है जब तलक, पुकारेंगे यही सदाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

कि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आवियाकि जन्नती हैं जन्नती सय्यिदि मु'आविया

अमीर-उल-मोमिनीन ! मु'आविया मु'आविया !सहाबी-ए-रसूल ! मु'आविया मु'आविया !कातिब-ए-वही ! मु'आविया मु'आविया !ख़ालुल-मोमिनीन ! मु'आविया मु'आविया !मुहिब्ब-ए-अहल-ए-बैत ! मु'आविया मु'आविया !

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